प्रधानमंत्री आवास घोटाला- लाड़ली बहना और वृद्धावस्था पेंशन पर हो सकता है असर
पीएम आवास योजना में हुआ घोटाला बना जनचर्चा का विषय
नर्मदापुरम। शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए घोटाले का मामला सामने आया है। सूत्रों की माने तो इस घोटाले में नगर पालिका के अधिकारियों की कथित संलिप्तता भी होना बताया जा रहा है। वहीं इस मामले से जुड़े हितग्राहियों के बैंक खाते सील किए जा रहे हैं। इस घोटाले में नपा के कुछ अधिकारियों का हाथ होना जिला मुख्यालय पर जनचर्चा का विषय बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि गरीब लाभार्थियों के खातों से अवैध वसूली की है। खाते सील होने से योजनाओं पर असर पड़ेगा पर लाड़ली बहना योजना और वृद्धावस्था पेंशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का पैसा लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसी के चलते कई गरीब परिवारों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में हुए पीएम आवास योजना में घोटाले का मामला सामने आया है, जो कि जनचर्चा में बना हुआ है। जिसमें लगभग आधे दर्जन से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। घोटाले की राशि लगभग तीन करोड़ पैंतालीस लाख रुपये बताई जा रही है। सब इंजीनियर वर्मा, जो कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे है उन्हे पदोन्नति दी गई है, जबकि शासन स्तर पर पदोन्नति बंद है। वर्मा को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में दोबारा नगर पालिका में पदस्थ किया गया है। जो न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। यह स्थिति लोगों के लिए असहनीय है और उनके न्याय की मांग को और जोर देती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 50 हितग्राहियों के खाते सील किए गए हैं, जिनके खाते में 5 से 6 लाख रुपये डाले गए थे। यह पैसा नपा केअधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा निकालकर हड़प लिया गया था। अब नगर पालिका प्रशासन इन गरीब हितग्राहियों से वसूली करने के आदेश दे रहा है, जबकि गलती नगर पालिका प्रशासन की है। अब देखना यह है कि शासन प्रशासन पीएम आवास योजना में हुए करोड़ों के घोटाले में शामिल इन अधिकारियों कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
मास्टरमाइंड को दोबारा लाए जाना बना जनचर्चा का विषय
प्रधानमंत्री आवास घोटाले के मास्टरमाइंड अधिकारी वर्मा को दोबारा नर्मदापुरम लाया गया है। कमिश्नर ने इनको आदेश भी दिए हैं। मालूम हो कि जब यह नगर पालिका में पूर्व में पदस्थ थे तब इन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया गया था। जिसमें कहा था कि हितग्राहियों के नाम कलेक्टर के अनुमोदन कराए बिना योजना का लाभ दे दिया गया । वहीं अनियमित भुगतान किया गया। इसके साथ ही हितग्राहियों का निर्माण कार्य नहीं हुआ। अनियमित भुगतान हुआ। लेंटर तक निर्धारित राशि से अधिक राशि का भुगतान हुआ। 2.50 लाख रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया गया। इस पर कार्रवाई करने का नोटिस दिया गया था। जिसका जवाब 15 दिन में मांगा गया था। अब इन्हें फिर से यहां दोबारा लाया गया है और सदस्य बनाया गया है ताकि मामले में लीपापोती कर सके। बताया जाता है कि तात्कालिक नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में श्री वर्मा पदस्थ थे। उनके खास थे और उन्हीं के इशारे पर वर्मा को यहां पदस्थ किया गया है। ताकि मामले की लीपापोती की जा सके। इस घोटाले से गरीब हितग्राही काफी प्रभावित हुए।
इनका कहना है
जिन लोगों के खाते में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि गई थी उनकी राशि वापस आ जाएगी। गलत तरीके से राशि चली गई थी। जब राशि वापस आ जाएगी तो उनका खाता ओपन कर दिया जाएगा। रही बात अधिकारियों की मिली भगत की तो इसमें जांच चल रही है।
हेमेश्वरी पटले
मुख्य नगर पालिका अधिकारी
नर्मदापुरम

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