अवैध रेत उत्खनन करने वाले रेत माफियाओं पर कब होगी कार्रवाई
क्या प्रशासन जनता को दिला पाएंगा महँगी रेत से निजात
सपनो के आशियानों पर अवैध रेत ठेकेदारों का कब्जा
एक तरफ महँगाई की मार, दूसरी तरफ रेत के दाम निकाल रहे जनता का दम
अवैध रेत उत्खनन कर सड़को पर फर्राटे मारते डम्फर दे रहे सबूत
नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश का माइनिंग कॉर्पोरेशन रेत मामले को लेकर कितना गंभीर है, ये पहले भी हम आपको बता चुके है, कि कैसे रेत खदान में अवैध उत्खनन पर कार्यवाही की फाइल दबा कर अधिकारी बैठ जाते है । हम बात कर रहे है जिलें की जहाँ रेत खदानों की रॉयल्टी बंद होने के बाद भी अवैध रेत उत्खनन और परिवहन जोरो से चल रहा है । और इस प्रकार से उत्खनन करने वालों को किस तरह से अधिकारियों का सहयोग मिल रहा है यह बात भी जगजाहिर हो रही है l जिले के खनिज अधिकारी की उदासीन कार्यप्रणाली का खामियाजा आम जनता को महंगी रेत खरीद कर आए दिन भुगतना पड़ रहा है । गौरतलब है कि चोरी की रॉयल्टी यूज कर बेतूल की रॉयल्टी रेत माफ़िया तबा और नर्मदा नदी का सीना प्रतिदिन छन्नी कर रहे है। जन चर्चा यह है की खनिज अधिकारी का इन्हें संरक्षण मिला हुआ है । वही जिलें की सड़कों पर रात और दिन दौड़ रहे ओवरलोड डम्फर और ट्रैक्टर ट्राली चीख चीख कर अपने किस्से सुना रहे है कि अवैध रेत उत्खनन निरंतर चल रहा है तभी तो अवैध परिवहन भी धड़ल्ले से किया जा रहा है । जिसको रोकने के लिए शायद कोई जिम्मेदार अधिकारी नही है । जो कि जिलें में चल रहे अवैध रेत उत्खनन पर नकेल कस सके ? वही आम जनता की खून पसीने की कमाई से अवैध रेत माफियाओं के प्रतिदिन लाखों के बारे न्यारे हो रहे हैं।
जरूरत है ऐसे सिस्टम को सुधारने की जो जनता को महँगी रेत खरीदने से निजात दिला सके । क्या संबंधित विभाग को आम जनता की परेशानी नही दिखाई देती है ? आखिर क्यों अवैध रेत को क्षेत्र की जनता को खरीदना पड़ रहा है ? क्या अधिकारी अवैध रेत उत्खनन करने वालो पर मेहरबान है ? जब जिलें में रेत की खदाने संचालित ही नही हो रही है तो किस बात की पगार ले रहे है । क्या विभाग के अधिकारी कर्मचारी को नही मालूम कि रेत उत्खनन से दिन रात अवैध ठेकेदार पीले सोनी की तस्करी कर रहे हैं । चोर चोर मौसेरे भाई ने तोड़ दी जनता की कमर, क्या अधिकारियों का कोई दायित्व नही बनता खासकर जब प्राकर्तिक संसाधन का दोहन खुले आम किया जा रहा है और आम लोगों को चोरी की रेत खरीद कर अपने सपनो के आशियाना बनाने के लिए भारी रकम चुकानी पड़ रही है ।

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