मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
नन्हे बच्चे हमारे देश का कल है, प्यार और खुशहाली के माहौल में शिक्षित करें- डीईओ श्री प्रजापति
शांति निकेतन मांटेसरी स्कूल मे 'दीक्षांत समारोह' संपन्न
एके एन न्यूज नर्मदापुरम। शांति निकेतन मांटेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोमवार को मोंटेसरी कक्षाओं के नन्हे विद्यार्थियों के लिए 'दीक्षांत समारोह' का भव्य आयोजन किया गया। यह अवसर उन नौनिहालों के लिए विशेष था जो अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कर अब औपचारिक स्कूली शिक्षा (कक्षा पहली) में कदम रख रहे हैं।
मुख्य अतिथि का प्रेरक उद्बोधन
समारोह के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एल.एन. प्रजापति ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा: "ये नन्हे बच्चे हमारे देश का कल हैं। इन्हें रटने के बजाय प्यार और खुशहाली के माहौल में शिक्षित करें। स्कूल की हर छोटी-बड़ी गतिविधि में बच्चों की सहभागिता अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि वास्तविक शिक्षा आनंदमयी वातावरण में ही फलीभूत होती है।" उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और विद्यालय के अनुशासन का पालन करने का भी आग्रह किया।
संस्कार और आधुनिकता का संगम ,विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल तिवारी ने स्कूल की प्रशंसा करते हुए कहा कि शांति निकेतन के विद्यार्थी न केवल देश, बल्कि विदेशों में भी जिले का गौरव बढ़ा रहे हैं। शाला प्राचार्य डॉ. के.एम. जॉर्ज ने शिक्षा को 'साझा जिम्मेदारी' बताते हुए कहा कि अभिभावक और शिक्षक मिलकर ही बच्चे के भविष्य को संवार सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि बच्चों को मोबाइल और टीवी के दुष्प्रभाव से दूर रखकर उनके सामने स्वयं एक 'आदर्श' प्रस्तुत करें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, परेड और स्वागत: कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों के सम्मान में आयोजित एक गरिमामय परेड से हुआ। संगीत शिक्षक अशोक सोनी के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
नृत्य की छटा: जूनियर और सीनियर मोंटेसरी के बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मंच संचालन: कार्यक्रम का प्रभावी एंकरिंग शिक्षिका अर्पिता लक्ष्मण ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कोऑर्डिनेटर नीति गुप्ता द्वारा किया गया।दीक्षांत का संदेश यह समारोह केवल एक विदाई नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक रहा है जहाँ शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की नींव को भी मजबूती दी जाती है।

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