संविधान सभा में 22 जुलाई 1947 में वर्तमान तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया।
नर्मदापुरम। शास गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ कामिनी जैन के मार्गदर्शन एवं राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डा हर्षा चचाने, डॉ रीना मालवीय के निर्देशन में राष्ट्रीय तिरंगा झंडा दिवस मनाया गया प्राचार्य ने छात्राओं को अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे देश के आजाद होने के बाद संविधान सभा में 22 जुलाई 1947 में वर्तमान तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया।
जिसमें तीन रंग थे। ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग है। सफेद रंग की पट्टी में नीले रंग से बना था अशोक चक्र जिसमें चौबीस तीलियां थीं जो धर्म और कानून का प्रतिनिधित्व करती थीं। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वही स्वरूप आज भी मौजूद हैं ।
सबसे पहले देश के राष्ट्रीय ध्वज की पेशकश 1921 में महात्मा गांधी ने की थी। जिसमें बापू ने दो रंग के झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बनाने की बात कही थी। इस झंडे को मछलीपट्टनम के पिंगली वैंकैया ने बनाया था।
1931 में स्वराज झंडे को ही राष्ट्रीय ध्वज की स्वीकृति दी। स्वराज झंडे पर आधारित तिरंगे झंडे के नियम कानून फ्लैग कोड ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए। जिसमें निर्धारित था कि झंडे का प्रयोग केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही किया जाएगा।
डॉ हर्षा चचाने ने बताया कि सन् 1947 से वर्तमान तिरंगा ध्वज को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया। डॉ रीना मालवीय ने बताया कि हमें ध्वज संहिता का पालन करना चाहिए शपथ में डॉ किरण पगारे, वर्षा चौधरी, भारती दुबे, डॉ श्रीकांत दुबे, डॉ अरुण सिकरवार, डॉ संध्या राय, कंचन ठाकुर, कैलाश डोंगरे, डा नीतू पवार, कीर्ति खरे, चेतना बोरीवाल, सौम्या चौहान, राष्ट्रीय सेवा योजना व महाविद्यालय की छात्राएं एवं स्टाफ उपस्थित रहा।
मनोज सोनी editor-in-chief


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