मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
पत्रकारों की सुरक्षा और जवाबदेही पर संसद में गूंजा स्वर--सांसद दर्शन सिंह चौधरी
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर संसद में उठी बुलंद मांग, पत्रकार सुरक्षित तो लोकतंत्र मजबूत
कलम की आज़ादी भी, जवाबदेही भी सांसद चौधरी ने रखी स्पष्ट नीति की मांग
एके एन न्यूज नर्मदा पुरम। होशंगाबाद नरसिंहपुर क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने संसद के शून्य काल के दौरान भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को मुखरता के साथ उठाया। उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक सुदृढ़ीकरण तथा पत्रकारिता के नाम पर हो रहे दुरुपयोग दोनों पहलुओं पर संतुलित और ठोस नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांसद चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है, जो शासन और जनता के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है। यह वही शक्ति है जो सत्ता को जवाबदेह बनाती है और समाज को जागरूक करती है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को संस्थागत सुरक्षा और सुविधाएँ प्राप्त हैं, वहीं पत्रकारों को अपेक्षित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। आज पत्रकार विशेषकर फील्ड में कार्यरत अनेक जोखिमों और असुरक्षाओं का सामना कर रहे हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने सरकार से प्रश्न किया कि क्या पत्रकारों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए एक व्यापक “पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति” बनाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि प्रस्तावित नीति में निम्नलिखित प्रावधान शामिल किए जाएँ कार्यस्थल, घर एवं फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान समुचित सुरक्षा व्यवस्था, रेल यात्रा में 50% रियायत की पुनर्बहाली, पत्रकारों एवं उनके परिवार के लिए जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा, बच्चों के लिए शिक्षा सहायता, आवास/ प्लॉट आवंटन या सरकारी आवास सुविधा, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर टोल शुल्क में रियायत आदि दी जाए।
सांसद चौधरी ने अपने वक्तव्य में प्रभावी शब्दों में कहा जब कलम सुरक्षित होगी, तब ही सच निर्भीक होकर सामने आएगा; और जब सच सामने आएगा, तभी लोकतंत्र और मजबूत होगा।इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की आड़ में हो रही ब्लैकमेलिंग और अनैतिक गतिविधियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और सख्त तंत्र विकसित किया जाए, जिससे पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कलम न झुके तो सत्ता सुधरती है, कलम बिक जाए तो लोकतंत्र कमजोर पड़ता है। सांसद ने यह भी रेखांकित किया कि ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पत्रकारों का संरक्षण जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी पत्रकारिता के नाम पर हो रहे दुरुपयोग पर कठोर नियंत्रण। अंत में उन्होंने सरकार से इस विषय पर शीघ्र ठोस कदम उठाने का आग्रह किया, ताकि लोकतंत्र और अधिक सशक्त हो सके तथा राष्ट्र प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे।

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