मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
ओणम का महत्व –14 किलो फूलों की रंगोली पूकलम
रंग-बिरंगे फूलों से सजी पूकलम (फूलों की रंगोली) ओणम की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक
रसुलिया निवासी शाइनी बैजू जोसफ ने अपने घर के आगन में 14 किलो ताज़े फूलों से पूकलम बनाई
एके एन न्यूज नर्मदा पुरम। ओणम केरल का प्रमुख त्योहार है। यह मुख्य रूप से राजा महाबली के स्वागत और उनकी स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि महाबली एक बहुत ही दयालु और न्यायप्रिय राजा थे। उनके समय में प्रजा बहुत सुखी थी।
कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर महाबली की परीक्षा ली और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। लेकिन महाबली को अपनी प्रजा से बहुत प्रेम था, इसलिए उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आने का वरदान मिला। इसी खुशी में लोग ओणम मनाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों से सजी पूकलम (फूलों की रंगोली) ओणम की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक है। इस अवसर पर रसुलिया निवासी शाइनी बैजू जोसफ ने अपने घर के आगन में 14 किलो ताज़े फूलों से पूकलम बनाई है। इसमें दो रंगों के गेंदे के फूल, गुलाब, हरे पत्ते, चाँदनी , रजनीगंधा और चेमंती के फूल का सुंदर संयोजन किया गया है। हर फूल अपनी खुशबू और रंगों के साथ इस रंगोली में आनंद, सकारात्मकता और उत्सव की भावना बिखेर रहा है।
ओणम का पारंपरिक भोजन ओणसद्य केले के पत्ते पर परोसा जाता है। इसमें चावल, सांभर, अवियल, थोरन, पचड़ी, अचार, केले के चिप्स और कई तरह के स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन होते हैं। अंत में स्वादिष्ट पायसम से भोजन पूरा किया जाता है। यह भोज केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और समृद्धि का प्रतीक भी है।


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