खरगोन 03 मार्च 2022। आदिवासी क्षेत्रों का ख्याल आते ही मन में ऊंची-ऊंची पहाड़ियों
पत्थर व मिट्टी में तैरती पगडंडी वाली सड़कें उभर आती है। सड़कों के अभाव में आदिवासी
दुर्गम क्षेत्रांे में न तो बच्चें स्कूल जा पाते हैं ना ही कोई रोगी स्वास्थ्य केंद्र न ही निर्धन
राशन दुकान तक न किसान अनाज मंडी तक पहुँच पाता है। इन सब अव्यवस्थाओं को
सुविधा में बदलने के लिए पीएम ग्राम सड़क योजना अस्तित्व में आयी। जो आज ऐसे
क्षेत्रों की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा रही है। खरगोन जिले में झिरन्या-
भीकनगांव और भगवानपुरा तीन जनपदों की सीमा रेखा के मुहाने पर पीएम सड़कें बनी है
जो चौराहे का निर्माण करती है। इन्ही सडकों से अब बच्चें, रोगी, गरीब व निर्धन, कृषक
और नौकरी पेशा नागरिक सरपट दौड़ जाते हैं।
न सिर्फ गांवों से जुड़े है बल्कि दो स्टेट हाइवे से जुड़ गई ग्रामीण पटरी
झिरन्या-भीकनगांव और भगवानपुरा मूलतः जिले की दुर्गम पहाड़ियों वाली जनजातीय
जनपद है। इन्हें आपस मंे जोड़ने के साथ ही उत्तर की ओर खंडवा-बड़ोदा (गुजरात) से
जुड़ा है तो दक्षिण की ओर जलगांव चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) से जोड़ती है ये सड़कें।
पीएमजीएसवाय की ये सड़के कांकरिया-मोरदड़ के लिए 4.80 किमी., घोड़ीबुजूर्ग-मोगरगांव के
लिए 1.24 किमी., सतवाड़ा-घोड़ीबुजूर्ग के लिए 6.45 किमी, कांकरिया-गोरखपुर के
लिए 7.83 किमी सड़के आपस में जुड़कर चौराहा बनाती है। ये सड़कें अन्य गांवो जैसे-
तिनस्या, रोशिया जागीर, आभापुरी शिवना, दामखेड़ा और मोगरगांव भी जुड़ गए हैं।
पीएमजीएसवाय के महाप्रबंधक श्री हरिप्रसाद जाटव ने बताया कि 20.296 किमी. लम्बी
सड़कें 458.14 करोड़ की लागत से अलग अलग समय पर बनकर तैयार हुई है। इस चौराहे
से प्रतिदिन एक अनुमान के अनुसार 80 हजार जिले के और 50 हजार बाहरी जिले के
निवासियों का आवागमन होता है।
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