भारतीय दर्शन सत्यम् शिवम सुंदरम पर आधारित है --डॉ शोभा रानी मिश्रा नर्मदापुरम । शासकीय नर्मदा कॉलेज में विश्व बैंक परियोजना के तहत दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से "दर्शन चित्रकला एवं नैतिक शिक्षा की विद्यार्थियों के जीवन में प्रासंगिकता" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य था विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अध्यात्मिक, सौंदर्य पक्ष और नैतिक मूल्यों का विकास भी हो ।आधुनिकता की होड़ में उनमें नैसर्गिक चिंतन की प्रधानता रहे। कार्यक्रम की संयोजक डॉ विनीता अवस्थी ने श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों की व्याख्या करते हुए विषय प्रवर्तन किया। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने अतिथि विद्वजनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु बनने की राह पर है । सांस्कृतिक जागरण काल में हम अपनी गौरवशाली परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। आवश्यकता है अपनी कला, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने की। डॉ शोभा रानी मिश्रा माधव कॉलेज उज्जैन से ऑनलाइन उपस्थित हुई। उन्होंने कर्तव्य पालन को धर्म बताते हुए कहा कि "कला ही धर्म का साकार स्वरूप है।" सौंदर्य, आनंद और कला प्रकृति में ही विद्यमान है। हमें गर्व है हमारा भारतीय दर्शन सत्यम शिवम सुंदरम पर केंद्रित है। मुख्य वक्ता आचार्य आनंद पुरुषार्थी अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता नर्मदा पुरम ने अपने व्याख्यान में नैतिक शिक्षा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी में व्यवहार के लिए धर्म, सदाचरण, नैतिक कर्तव्य आवश्यक हैं ।इन गुणों की उसके मन मस्तिष्क में स्थापना अनुकरण, विचार मंथन, मित्र मंडली, समाज, आस पास के वातावरण और धार्मिक पृष्ठभूमि से होती है। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नित्या पटेरिया और आभार डॉ एन आर अडलक ने किया। डॉ अर्पणा श्रीवास्तव, डॉ सुधीर दिक्षित, डॉ ममता गर्ग, वंश धुर्वे, आकाश ,पूनम ,सुहानी सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। - AKN News India

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Saturday, 11 February 2023

भारतीय दर्शन सत्यम् शिवम सुंदरम पर आधारित है --डॉ शोभा रानी मिश्रा नर्मदापुरम । शासकीय नर्मदा कॉलेज में विश्व बैंक परियोजना के तहत दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से "दर्शन चित्रकला एवं नैतिक शिक्षा की विद्यार्थियों के जीवन में प्रासंगिकता" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य था विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अध्यात्मिक, सौंदर्य पक्ष और नैतिक मूल्यों का विकास भी हो ।आधुनिकता की होड़ में उनमें नैसर्गिक चिंतन की प्रधानता रहे। कार्यक्रम की संयोजक डॉ विनीता अवस्थी ने श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों की व्याख्या करते हुए विषय प्रवर्तन किया। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने अतिथि विद्वजनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु बनने की राह पर है । सांस्कृतिक जागरण काल में हम अपनी गौरवशाली परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। आवश्यकता है अपनी कला, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने की। डॉ शोभा रानी मिश्रा माधव कॉलेज उज्जैन से ऑनलाइन उपस्थित हुई। उन्होंने कर्तव्य पालन को धर्म बताते हुए कहा कि "कला ही धर्म का साकार स्वरूप है।" सौंदर्य, आनंद और कला प्रकृति में ही विद्यमान है। हमें गर्व है हमारा भारतीय दर्शन सत्यम शिवम सुंदरम पर केंद्रित है। मुख्य वक्ता आचार्य आनंद पुरुषार्थी अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता नर्मदा पुरम ने अपने व्याख्यान में नैतिक शिक्षा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी में व्यवहार के लिए धर्म, सदाचरण, नैतिक कर्तव्य आवश्यक हैं ।इन गुणों की उसके मन मस्तिष्क में स्थापना अनुकरण, विचार मंथन, मित्र मंडली, समाज, आस पास के वातावरण और धार्मिक पृष्ठभूमि से होती है। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नित्या पटेरिया और आभार डॉ एन आर अडलक ने किया। डॉ अर्पणा श्रीवास्तव, डॉ सुधीर दिक्षित, डॉ ममता गर्ग, वंश धुर्वे, आकाश ,पूनम ,सुहानी सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे।


 भारतीय दर्शन सत्यम् शिवम सुंदरम पर आधारित है --डॉ शोभा रानी मिश्रा

नर्मदापुरम । शासकीय नर्मदा कॉलेज में विश्व बैंक परियोजना के तहत दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से "दर्शन चित्रकला एवं नैतिक शिक्षा की विद्यार्थियों के जीवन में प्रासंगिकता" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य था विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अध्यात्मिक, सौंदर्य पक्ष और  नैतिक मूल्यों का विकास भी हो ।आधुनिकता की होड़ में उनमें नैसर्गिक चिंतन की प्रधानता रहे। कार्यक्रम की संयोजक डॉ विनीता अवस्थी ने  श्रीमद्भगवद्गीता और  श्रीरामचरितमानस द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों की व्याख्या करते हुए विषय प्रवर्तन किया। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने अतिथि  विद्वजनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि  भारत विश्व गुरु बनने की राह पर है । सांस्कृतिक जागरण  काल में हम अपनी गौरवशाली परंपराओं की  ओर लौट रहे हैं। आवश्यकता है अपनी कला, संस्कृति और नैतिक मूल्यों  को  आत्मसात करने की। डॉ शोभा रानी मिश्रा माधव कॉलेज उज्जैन से ऑनलाइन उपस्थित हुई। उन्होंने कर्तव्य पालन को धर्म बताते हुए कहा कि "कला ही धर्म का साकार स्वरूप है।" सौंदर्य, आनंद और कला प्रकृति में ही विद्यमान है। हमें गर्व है हमारा भारतीय दर्शन सत्यम शिवम सुंदरम पर केंद्रित है। मुख्य वक्ता आचार्य आनंद पुरुषार्थी अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता नर्मदा पुरम ने अपने व्याख्यान में नैतिक शिक्षा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी में व्यवहार के लिए धर्म, सदाचरण, नैतिक कर्तव्य आवश्यक हैं ।इन गुणों की उसके मन मस्तिष्क में स्थापना अनुकरण, विचार मंथन, मित्र मंडली, समाज, आस पास के वातावरण और धार्मिक पृष्ठभूमि से होती है। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नित्या पटेरिया और आभार डॉ एन आर अडलक ने किया। डॉ अर्पणा श्रीवास्तव, डॉ सुधीर दिक्षित,  डॉ ममता गर्ग, वंश धुर्वे, आकाश ,पूनम ,सुहानी  सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

मनोज सोनी की रिपोर्ट

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