शिक्षा और संस्कार उत्तम शिक्षा , सफल और सुखी जीवन पाने का एकमात्र रास्ता है– आचार्य पं. सोमेश परसाई बिना संस्कार मात्र शिक्षा से संपूर्ण व्यक्तित्व विकास अधूरा है। इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए– डॉ. आशीष चटर्जी - AKN News India

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Sunday, 2 April 2023

शिक्षा और संस्कार उत्तम शिक्षा , सफल और सुखी जीवन पाने का एकमात्र रास्ता है– आचार्य पं. सोमेश परसाई बिना संस्कार मात्र शिक्षा से संपूर्ण व्यक्तित्व विकास अधूरा है। इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए– डॉ. आशीष चटर्जी



 

शिक्षा और संस्कार उत्तम शिक्षा , सफल और सुखी जीवन पाने का एकमात्र रास्ता है– आचार्य पं. सोमेश परसाई 


बिना संस्कार मात्र शिक्षा से संपूर्ण व्यक्तित्व विकास अधूरा है। इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए– डॉ. आशीष चटर्जी 

नर्मदा पुरम। शिक्षा जीवन का आधार है। इसके बिना जीवन अंधकारमय है। शिक्षा और संस्कार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा मनुष्य के जीवन का अनमोल उपहार है जो किसी व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है। शिक्षा और संस्कार जिदगी जीने के मूल मंत्र है। शिक्षा कभी झुकने नहीं देगी और संस्कार कभी गिरने नहीं देंगे। शिक्षा का तात्पर्य सम्पूर्ण प्रतिभा का समग्र उन्नयन है, जिसे बच्चे अपनी कल्पनाओं की असीम उड़ान भर कर पाते हैं। लेकिन बच्चों की उड़ान को तभी पंख लगेंगे, जब उनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ साथ बेहतर संस्कार भी होऊ। 

यह संस्कार द चैम्प्स फन स्कूल में शिक्षा जगत को एक नया आयाम देने  के लिए निरंतर किया जा रहा है। विद्यालय में विद्यारंभ संस्कार का कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें आचार्य पं. सोमेश परसाई जी के आचार्यत्व में अभिभावकगणों ने अपने बच्चों का विद्यारंभ संस्कार पूर्ण करवाया। कार्यक्रम में  नर्मदापुरम जिले के कलेक्टर नीरज कुमार सिंह , नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू यादव, एसपीएम के उप महाप्रबंधक अखिलेश गुप्ता, एनसीसी के सूबेदार मेजर जटाशंकर, संज्ञा समिति के अध्यक्ष पीके चटर्जी, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ आरपी सीठा, मठ मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ गोपाल प्रसाद खड्डर, प्रसन्न हरने, पार्षद श्रीमति मीना वर्मा, अनोखीलाल राजोरिया, हंस राय, समाजसेवी शक्ति सिंह रघुवंशी, संतोष व्यास, डॉ एसएस मोटवानी सहित अनेकों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथिजन के साथ - साथ बहुत बड़ी संख्या में नर्मदांचल के  अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के साथ सहभागिता दी। 

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर विद्यालय के बच्चों की नृत्य और गीत प्रस्तुति से हुया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थिति लोगों का मन मोह लिया। विद्यारंभ संस्कार के पूजन कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चारण के साथ हुई। बड़ी संख्या में उपस्थित नन्हे-मुन्ने बच्चों के पालकों ने बड़ी प्रसन्नता के साथ गणेश जी और मां सरस्वती से प्रार्थना  की कि वे उन पर अपनी कृपा बनाए रखें। आचार्य जी द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अभिभावकों और बच्चों से स्लेट - कलम की पूजा करवाई। उन्होंने माता- पिता तथा गुरुओं के आशीर्वाद के साथ इस संस्कार को विधिवत पूर्ण करवाई। मंत्रोच्चार की ध्वनि से सारा वातावरण पावन पवित्र हो गया। विद्यारंभ संस्कार  के पश्चात महाआरती हुई।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्माननीयजन तथा अभिभावको को प्रसाद सहित विदा किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम व्यवस्थित व सुनियोजित रहा । शाला संचालक सुभाशीष चटर्जी ने बताया कि बच्चों को भौतिक सुख सुविधा, अच्छी शिक्षा के साथ-साथ धर्म शास्त्रों व अच्छे संस्कारों की सीख आवश्यक है। बच्चों को गुरुओं का सम्मान करना चाहिए। बच्चे बड़े होकर चाहे कितनी ही ऊंचाइयों को प्राप्त कर लें शिक्षक के आशीर्वाद के बिना उनकी सफलता असंभव है अतः बच्चों को हमेशा गुरुओं का सम्मान करना चाहिए। विद्यारम्भ संस्कार द्वारा बालक-बालिका में उन मूल संस्कारों की स्थापना की  गई  है, जिनके आधार पर उसकी शिक्षा मात्र ज्ञान न रहकर जीवन निर्माण करने वाली हितकारी विद्या के रूप में विकसित हो सके।  विद्यारंभ संस्कार द्वारा बालक के मन में ज्ञान प्राप्ति के लिए उत्साह पैदा किया जाता है। उत्साह भरी मनोभूमि में वांछित ज्ञानपरक संस्कारों का बीजारोपण भी सम्भव हो जाता है।

विद्यालय में आयोजित विद्यारंभ संस्कार समारोह का  उद्देश्य बच्चों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ - साथ बेहतर संस्कार का समावेश करना है जिससे आने वाले समय में बच्चा सही दिशा में अग्रसर हो सके और अपने विवेक से सही निर्णय कर जीवन में सफलता पाएगा।

आचार्य पंडित सोमेश परसाई द्वारा अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों का मन विद्या और ज्ञान की तरफ बढ़े इसके लिए हर माता-पिता को विद्यारंभ संस्कार करवाना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार इसके लिए पांच वर्ष की अवस्था उचित मानी गई है। हालांकि वर्तमान समय के प्रतिस्पर्धी दौर में लोग अपने बच्चों को पांच वर्ष से पहले ही शिक्षा देने लगे हैं। ऐसी स्थिति में यह कहना ज्यादा उचित होगा कि आप बालक या बालिका को चाहे किसी भी अवस्था से विद्या ग्रहण करवाएं लेकिन इसकी शुरुआत विद्यारंभ संस्कार से ही करें। इससे बच्चों में अध्ययन का उत्साह पैदा होता है। 

पालकों में इस कार्यक्रम को लेकर बहुत उत्साह था उन्होनें कार्यक्रम में  बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया एवं अपने बच्चों का विद्यारम्भ संस्कार संपन्न कराया। प्राचीन आश्रम जैसे वातावरण में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ एवं सभी लोगों द्वारा कार्यक्रम की बहुत सराहना की गई। कार्यक्रम में सहयोगी स्प्रिंगडेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल परिवार रहा। वॉलिंटियर्स बच्चों के सहयोग की सराहना कर उनका अभ्यर्थना की गई। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने अपने सभी शिक्षकों का सम्मान कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीतू तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम प्रभारी श्रीमति रीना मालवीय और श्रीमति नेहा राठौर ने बताया कि कार्यक्रम में द चैम्प्स फन स्कूल और स्प्रिंगडेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभी स्टाफ ने भरपूर सहयोग किया।

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