समर्थ सद् गुरु भैयाजी सरकार और जमात का नर्मदापुरम जिले में आगमन हुआ
. होली पर्व नर्मदापुरम में अपनी जमात के साथ मनाएंगे दादागुरु
नर्मदापुरम। मां नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों का जीवन बचाने तथा प्रकृति, पर्यावरण और गौवंश के संरक्षण संवर्धन के लिए पिछले तीन वर्षों से निराहार महाव्रत करने वाले अवधूत महायोगी श्री समर्थ सद्गुरु दादागुरु भैयाजी सरकार की निराहार निर्जला नर्मदा सेवा परिक्रमा का प्रवेश नर्मदापुरम जिले में हो गया है। संत भैयाजी सरकार एक दिन में 25 से 30 किलोमीटर तक की यात्रा कर रहे हैं।
यहां बीटीआई रोड पर स्थित दादा की कुटिया में दो दिन बितायेंगे और अपनी जमात के साथ होली पर्व नर्मदापुरम में ही मनायेंगे। दादा गुरु 21 मार्च को बनखेड़ी में प्रवेश कर चुके है। वहां से पिपरिया और पिपरिया से सोहागपुर माखन नगर क्षेत्र होते हुए नर्मदापुरम की ओर आगमन होगा। संतजी के शिष्यों ने बताया कि पहले निराहार नर्मदा परिक्रमा की थी, लेकिन इस बार वे निर्जल परिक्रमा कर रहे हैं और केवल हवा पर आश्रित रहकर परिक्रमा कर रहे हैं।
पं तेजेश्वर प्रसाद मिश्र, नरेंद्र सिंह सोलंकी, डॉ श्रीमती स्मिता संजय रिछारिया इंजीनियर हरिकृष्ण नायक, दीपक पंवार, संजय शैलेट, श्रीमती संगीता सोलंकी, श्रीमती योगिता शैलेट, पीयूष मिश्रा, विवेक शर्मा सहित नर्मदा मिशन के कार्यकर्ता संतजी की परिक्रमा यात्रा की तैयारी में जुटे हुए हैं।
दरअसल दादा गुरु नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों के साथ साथ मिट्टी, पेड़, पहाड़ों या संपूर्ण प्रकृति के संरक्षण संवर्धन के लिए सामाजिक जागरुकता का उद्देश्य लेकर इस मिशन में अनेक वर्षों से लगे हुए हैं। नर्मदापुरम में होने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम में भजन कीर्तन के आयोजन भी होंगे।
मां नर्मदा स्वच्छ निर्मल हो और प्रकृति दूषित होने से बचे पर्यावरण शुद्धता के लिए संत तीन वर्ष से अधिक समय से निराहार हैं। दादा गुरु ने अपना सर्वस्व धर्म, धरा, धेनु मां नर्मदा और प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन में न्यौछावर कर दिया है। सतत नर्मदा पथ पर गतिशील रहकर सेवा साधना और संरक्षण संवर्धन में अपना जीवन समर्पित किए हुए हैं और ज्ञान विज्ञान को चुनौती देते हुए पिछले तीन वर्षों से सिर्फ नर्मदाजल ग्रहण कर मां नर्मदा की जीवंतता और सत्यता को देश दुनिया के सामने प्रकट कर चुके हैं। निराहार महाव्रत के दौरान ही दादागुरु ने अनेकों यात्राओं के अतिरिक्त पिछले वर्ष सिर्फ नर्मदा जल ग्रहण कर 3200 किमी की मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा का प्रथम चरण पूर्ण किया था। वर्तमान में वे निराहार निर्जला रहते हुए सिर्फ वायु पर मां नर्मदा की द्वितीय चरण की पैदल परिक्रमा में हैं।
मनोज सोनी एडिटर इन चीफ

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