मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
भगवान श्रीरामजी सीता हरण के बाद उनकी खोज में व्याकुल वन वन भटकते हैं शबरी के आश्रम पहुंचे
नर्मदा पुरम। भगवान श्रीरामजी सीता हरण के बाद उनकी खोज में व्याकुल वन वन भटकते हैं शबरी के आश्रम पहुंच कर उन्हें नवधा भक्ति सुनाकर श्रीराम ऋष्यमुख पर्वत के पर निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं सुग्रीव अपने दूत हनुमान जी को श्रीरामजी के पास उनको लिवाने पहुंचाते हैं ,हनुमानजी श्रीराम को लेकर सुग्रीव के पास आतें हैं और यहां श्रीराम मैत्री होती है इसी प्रसंग में सुग्रीव राम को व्याकुल देखते हैं और उनकी सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं श्री राम सुग्रीव के भाई बाली से मुक्त करने का यंत्र करते हैं।
यहीं पर सुग्रीव एवं बाली का संघर्ष होता है ,श्रीराम सुग्रीव की रक्षा के लिए बाली का वध कर देते हैं ,सुग्रीव को किष्किंधा का राज देकर बालिपुत्र अंगद को युवराज बनाते हैं , यहीं से श्रीराम सुग्रीव एवं हनुमान की वानर सेना सहित सीताजी की खोज में निकलते हैं ,उनको समुद्र तट पर जटायु का भाई सम्पाती मिलता है जो सभी को रावण का पता बतलाता है । लीला में सुभाष परसाई ने रावण , गोपाल शुक्ला ने बाली , दीपेश व्यास ने हनुमान , अरुण तिवारी ने जामवंत , दीपक साहू ने सुग्रीव , मनोज परसाई ने शबरी , योगेन्द्र दिवोलिया ने जटायु का अभिनय किया ।

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