सियासी संग्राम के चलते सीएमओ ने मांगा ट्रांसफर, काम करना हुआ मुश्किल ,आरोप प्रत्यारोप से बढ़ी परेशानी
सिवनी मालवा। नगर पालिका सिवनी मालवा में विकास कार्यों की जगह अब राजनीतिक उठा-पटक और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। नेताओं की आपसी खींचतान और दबाव की राजनीति के चलते नगर पालिका सीएमओ शीतल भलावी ने शासन से स्वयं के तबादले की मांग की है। सीएमओ शीतल भलावी ने शासन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उन्हें झूठी शिकायतों, राजनीतिक हस्तक्षेप और अनावश्यक दबाव के कारण मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें सिवनी मालवा से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे सुचारू रूप से अपनी शासकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। यह बात संभागीय मुख्यालय पर जनचर्चा का विषय बनी हुई है।
ईमानदारी बनी परेशानी का कारण
शीतल भलावी जो कि आदिवासी समुदाय से आती हैं, ने नगर पालिका में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से लागू किया। लेकिन, नगर पालिका अध्यक्ष और कुछ पार्षदों को यह रास नहीं आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष उन पर गलत कार्यों को मंजूरी देने का दबाव बनाते हैं। जब वे इस तरह के दबाव में नहीं आतीं, तो पार्षदों को उकसाकर उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं। आंदोलन की धमकी दी जाती है और ट्रांसफर कराने के लिए साजिश रची जाती हैं।
टकराव की स्थिति
जनचर्चा यह भी है कि सिवनी मालवा की नगर पालिका में भाजपा के दो गुट सक्रिय हैं। पहला गुट सीएमओ शीतल भलावी का समर्थन करता है क्योंकि वे ईमानदारी और निष्ठा से कार्य कर रही हैं।दूसरा गुट नगर पालिका अध्यक्ष के साथ है, जो किसी भी कीमत पर सीएमओ को काम नहीं करने देना चाहता।
राजनीति की भेंट चढ़ता विकास
नगर पालिका के इस राजनीतिक संग्राम का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। विकास कार्य ठप हो चुके हैं और जो योजनाएं आम नागरिकों के हित में थीं, वे भी राजनीति का शिकार हो रही हैं।
सीएमओ का स्पष्ट संदेश: अब और नहीं
लगातार हो रहे राजनीतिक हस्तक्षेप और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर सीएमओ शीतल भलावी ने सरकार से खुद को तुरंत अन्यत्र पदस्थ करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष रूप से काम करने का माहौल नहीं मिलेगा, तब तक प्रशासनिक अधिकारी स्वतंत्र रूप से जनहित में कार्य नहीं कर पाएंगे।
अब विभाग क्या कदम उठाएगा, टिकी निगाहें
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्य प्रदेश शासन और नगरीय विकास विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या सीएमओ की मांग पर कार्रवाई होगी, या फिर राजनीतिक दबाव के आगे प्रशासन झुक जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से सिवनी मालवा नगर पालिका में शासन-प्रशासन की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं और यह मामला जनचर्चा के साथ साथ अब तूल पकड़ता जा रहा है।
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