भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है चेटीचांद
धर्म की रक्षा के लिए भगवान झूलेलाल ने लिया था अवतार
झूलेलाल जयंती पर निकाली भव्य शोभायात्रा, कई जगहों पर हुआ स्वागत
एके एन न्यूज़ नर्मदा पुरम। चैत्र शुक्ल पक्ष से सिंधी नववर्ष का आरंभ होता है। इसे चेटीचंड के नाम से जाना जाता है। चैत्र मास को सिंधी में चेट कहा जाता है और चांद को चण्डु। इसलिए चेटीचंड का अर्थ हुआ चैत्र का चांद। इस अवसर पर सिंधी समाज द्वारा शहर के प्रमुख मार्गो से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसका अनेक जगह पर स्वागत किया गया। इसके साथ ही भगवान की झांकी सजाई गई।
इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाएं हैं। गौरतलब है कि चेटीचंड को अवतारी युगपुरुष भगवान झूलेलाल के जन्म दिवस के रूप में जाना जाता है। भगवान का जन्म सद्भावना और भाईचारा बढ़ाने के लिए हुआ था। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत के अन्य प्रांतों में आकर बस गए हिंदुओं में झूलेलाल को पूजने का प्रचलन ज्यादा है।भगवान झूलेलालजी को जल और ज्योति का अवतार माना गया है।
इसलिए लकड़ी का मंदिर बनाकर उसमें एक लोटे से जल और ज्योति प्रज्वलित की जाती है और इस मंदिर को श्रद्धालु चेटीचंड के दिन अपने सिर पर उठाते हैं, जिसे बहिराणा साहब भी कहा जाता है। प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी झूलेलाल जयंती पर सिंधी समाज द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें महिला पुरुष और बच्चों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।


.jpg)
No comments:
Post a Comment