मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
परम पूज्यनीय जगदंबा के अलावा कोई नहीं है-आचार्य पं जितेन्द्रिय महाराज
सतरस्ते पर जारी है देवी भागवत कथा, कथा का विश्राम 27 मार्च को होगा
नर्मदापुरम। यदि दुनिया में कोई परम पूज्यनीय है तो सिर्फ जगदंबा हैं। उनके अलावा परम पूज्यनीय कोई और नहीं है। हर कोई के लिए परम पून्यनीय शब्द नहीं लगाना चाहिए। यह अमृत उद्गार देवी भागवत कथा दक्षिणेश्वरी माता महाकाली सांस्कृतिक उत्सव समिति द्वारा सतरस्ते पर आयोजित देवी भागवत कथा में राजराजेश्वरी बाराही धाम डुंगारिया जिला सीहोर से पधारे सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय कथा वाचक आचार्य पं जितेन्द्रिय महाराज (बशिष्ठ) ने व्यक्त किए।
आगे उन्होंने कहा कि ब्रम्हा विष्णु महेश भी जिनकी सेवा करते हैं वह सिर्फ जगदंबा ही हैं। आप सब सौभाग्य शाली है कि मां नर्मदा के पावन तट नर्मदापुरम में रहते हैं। नवरात्र महोत्सव में देवी भागवत कथा श्रवण कर रहे हैं। इसमें भी देवी की ही कृपा है। आप सब मां नर्मदा तटवासी जिनका जन्म नर्मदा नगरी में हुआ है। प्रतिदिन मां के दर्शन कर रहे हैं। नवरात्र में देवी मां की पूजा अर्चना और देवी भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं। इसलिए मां नर्मदा के तटवासी तीन स्टार वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह सत्कर्म करना बड़े भाग्यशालियों को प्राप्त होता है। नवरात्र महोत्सव में देवी मां की उपासना करने से अपार पुण्य और कृपा प्राप्त होती है। यह शक्ति और भक्ति का पर्व है। देवी आराधना से साधक को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आचार्य श्री के द्वारा दस महाविद्या, 51 शक्ति पीठ, चौसठ योगिनी सहित अन्य देवियों के चरित्र की कथाएं सुनाई जा रही हैं। जिसे सुनकर श्रद्धालु धन्य हो रहे हैं। दस महा विद्याओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि दस महाविद्याओं में देवि काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी भुवनेश्वरी छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला हैं।
इनकी साधना से आध्यात्मिक जागृति भय से मुक्ति और जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसी के साथ देवी सति के अंग जहां जहां गिर वहां पर शक्ति पीठ हैं। देवी भागवत कथा के दौरान आचार्यजी के द्वारा 51 पीठ की देवियां के चरित्र की कथा भी सुनाई जा रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रकाश शिवहरे ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक जारी रहती है। कथा का विश्राम 27 मार्च को होगा। विश्राम दिवस पर कथा स्थल से भव्य जवारे निकाले जाएंगेे। जो नर्मदा जी में गाजे बाजे के साथ विसर्जन के लिए ले जाए जाएंगे। कथा स्थल पर विभिन्न देवियों के स्वरूप की झांकिया भी दिखाई जा रही है।


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