देवी सती के अग्निकुंड में कूदने की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विह्वल भगवती पार्वती के जन्म की कथा सुनकर मगन हुए श्रद्धालु, जमकर हुई पुष्प वर्षा कल शिव पार्वती के विवाह की कथा में निकलेगी शिव बारात - AKN News India

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Sunday, 22 March 2026

देवी सती के अग्निकुंड में कूदने की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विह्वल भगवती पार्वती के जन्म की कथा सुनकर मगन हुए श्रद्धालु, जमकर हुई पुष्प वर्षा कल शिव पार्वती के विवाह की कथा में निकलेगी शिव बारात



मनोज सोनी एडिटर इन चीफ 


देवी सती के अग्निकुंड में कूदने की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विह्वल

भगवती पार्वती के जन्म की कथा सुनकर मगन हुए श्रद्धालु, जमकर हुई पुष्प वर्षा 

कल शिव पार्वती के विवाह की कथा में निकलेगी शिव बारात     


नर्मदापुरम। माता सती के पिता प्रजापति दक्ष शिव जी से नाराज थे। दक्ष शिव जी को अपमानित करने के अलग.अलग अवसर खोजते रहते थे। स्वयंवर में नहीं बुलाया। दक्ष की पुत्री सती ने भगवान शिव से विवाह कर लिया था और दक्ष इस विवाह को रोक नहीं सके। विवाह के कुछ समय बाद दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया और इस यज्ञ में सभी देवी.देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन जानबूझकर शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया।

 माता सती को नारद से मालूम हुआ कि उनके पिता दक्ष यज्ञ करवा रहे हैं। सती इस यज्ञ में जाने के लिए तैयार हो गईं। शिव जी ने देवी सती को समझाया कि बिना बुलाए हमें यज्ञ जैसे आयोजन में नहीं जाना चाहिए। लेकिन शिव जी के समझाने पर भी देवी नहीं मानीं और यज्ञ में चली गईं। जब सती यज्ञ स्थल पर पहुंचकर देखा कि यज्ञ में शिव जी के अतिरिक्त सभी देवी.देवता आए हुए हैं। सती ने पिता दक्ष से शिव जी को न बुलाने का कारण पूछा तो दक्ष ने कहा कि मैंने शिव को नहीं बुलाया था और तुम्हें भी नहीं बुलाया। 

अपने पति शिव जी का अपमान सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने हवन कुंड में कूदकर अपनी छाया रूपी देह त्याग दी। जब ये बात शिव जी को मालूम हुई तो वे बहुत क्रोधित हो गए। शिव जी के क्रोध से वीरभद्र प्रकट हुए। इसके बाद शिव जी के कहने पर वीरभद्र ने यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद भगवान शिव माता सती के जलते हुए शरीर को लेकर दौडे़ तो भगवान विष्णु ने शिव का कोप शांत करने के लिए माता के शरीर के सुदर्शन चक्र से टुकड़े किए जहां जो शरीर का हिस्सा गिरा उसी नाम से माता का सिद्धपीठ स्थापित हो गया।

 यह अमृत उद्गार देवी भागवत कथा  दक्षिणेश्वरी माता महाकाली सांस्कृतिक उत्सव समिति द्वारा आयोजित देवी भागवत कथा के चतुर्थ दिवस राजराजेश्वरी बाराही धाम डुंगारिया जिला सीहोर से पधारे सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय कथा वाचक पं जितेन्द्रिय महाराज (बशिष्ठ) ने व्यक्त किए। देवी सती की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विह्वल हो गए।

माता पार्वती के जन्म की कथा ने किया आनंदित   

 जब आचार्य पं जितेंद्रिय महाराज ने माता पार्वती के जन्म की कथा सुनाई इसी बीच एक छोटी कन्या को पार्वती के रूप में समिति अध्यक्ष प्रकाश शिवहरे पालकी में लेकर कथा स्थल से व्यासपीठ की ओर लेकर जा रहे थे तभी पंडाल में विराजमान हजारों श्रोताओं ने कन्या रूपी देवी पर पुष्प वर्षा की। कथा व्यास पं जितेंद्रिय महाराज ने जैसे की झूला झूलन आई होे मां जगदंबे भवानी भजन गाया तो सभी श्रोता नाचने लगे।

कल निकलेगी शिव बारात 

देवी भागवत कथा के दौरान पांचवे दिन माता पार्वती के विवाह की कथा होगी। जिसमें शिव बारात निकाली जाएगी। आयोजन समिति द्वारा शिव बारात में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने का श्रद्धालुओं से आव्हान किया गया है। कथा स्थल पर पूर्व नपाध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल, अनेक पार्षदगण, वरिष्ठ पत्रकार बलराम शर्मा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।


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