संस्कार से सवरेगा भविष्य: अक्षय तृतीया पर खेड़ापति मंदिर में गूंजेंगे वैदिक मंत्र
एके एन न्यूज नर्मदापुरम । मालाखेड़ी आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों को सींचने के उद्देश्य से आगामी 20 अप्रैल 2026 को मालाखेड़ी में एक गौरवमयी आध्यात्मिक उत्सव होने जा रहा है। 'संस्कार ही संस्कृति का आधार हैं' के संकल्प के साथ, अक्षय तृतीया के मंगलकारी अवसर पर बटुकों के लिए विशाल सामूहिक जनेऊ संस्कार का आयोजन किया गया है।
आध्यात्मिक चेतना का जागरण
प्रसिद्ध विद्वान आचार्य पं. हरिओम मिश्रा के निर्देशन में यह अनुष्ठान संपन्न होगा। हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में 'यज्ञोपवीत' का स्थान सर्वोपरि है। आचार्य जी का मानना है कि यह संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अनुशासन, बौद्धिक प्रखरता और आत्मिक बल प्रदान करने वाली एक प्राचीन वैज्ञानिक पद्धति है।
आयोजन की महत्वपूर्ण कड़ियाँ
निशुल्क सहभागिता: सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने हेतु आयोजकों ने इस पूरे कार्यक्रम को पूर्णतः मुफ्त रखा है।शास्त्रोक्त नियम विधि-विधान की शुद्धता बनाए रखने के लिए सम्मिलित होने वाले बालकों हेतु मुंडन संस्कार अनिवार्य किया गया है। शुभ घड़ी: अक्षय तृतीया के सिद्ध मुहूर्त में, प्रातः8:00बजे* से मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी।*स्थान पावन खेड़ापति हनुमान मंदिर परिसर, मालाखेड़ी।
क्यों है यह संस्कार खास?
यज्ञोपवीत धारण करने के पश्चात ही बालक 'द्विज' कहलाता है, जिसका अर्थ है दूसरा जन्म। यह तीन धागों का पवित्र सूत्र उसे देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण की याद दिलाता रहता है। अक्षय तृतीया जैसे स्वयंसिद्ध मुहूर्त में यह संस्कार बटुकों के जीवन में दिव्यता और सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा।
पंजीकरण की जानकारी
यदि आप अपने पुत्र को सनातन धर्म की इस महान परंपरा का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो अविलंब नीचे दिए गए सूत्रों पर संपर्क करें: हेल्पलाइन: 9755419129, 8770024879 गंतव्य: खेड़ापति मंदिर, मालाखेड़ी (नर्मदापुरम) संस्कारों की इस पावन धारा में सम्मिलित होकर अपनी भावी पीढ़ी को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाएं।

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