नर्मदापुरम/14,मार्च,2022/ 14 मार्च सोमवार को जिला प्रशिक्षण केन्द्र जिला चिकित्सालय नर्मदापुरम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रदीप मोजेश की अध्यक्षता में आरबीएसके चिकित्सकों , स्टाफनर्स , एएनएम एवं डाटा एन्ट्री ऑपरेटर्स को जन्मजात विकृति की पहचान , उपचार एवं पोर्टल में एन्ट्री करने का प्रशिक्षण दिया गया। मास्टर ट्रैनर डॉ. सुनील गौर ने प्रशिक्षण में बताया कि जन्म के समय विकृति क्या है, जन्म के समय विकृति की शीघ्र पहचान क्यों आवश्यक है एवं माता पिता के लिये महत्वपूर्ण संदेश क्या है, जिससे हम समय रहते शिशुओं का उपचार कर सकें। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नलिनी गौड ने बताया कि प्रमुख जन्मजात विकृतियों में स्नायु ट्यूब, बौनापन, मानसिक स्वास्थ्य, फटे होठ और तालु, क्लब फुट, जन्मजात मोतियाबिंद, बहरापन, सीने में छेद, गंभीर कुपोषण, घेंघा रेाग इत्यादि हैं, जिनकी पहचान कर हितग्राही को समीप की संस्था में विशेषज्ञों से उपचार कराना प्रमुख है।.jpg)
जिला प्रशिक्षण केन्द्र में ही राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत सभी ब्लाॅकों में कार्यरत कोल्ड चैन हेण्डलर, सहायक कोल्ड चैन हैण्डलर को फ्रिज एवं अन्य उपकरण के रखरखाव का रिफ्रेशर प्रशिक्षण श्री सतीश पटैल एवं श्री माधव दीक्षित द्वारा दिया गया । प्रशिक्षण में सभी प्रकार की वैक्सीनों को नियत तापमान पर रखने एवं रीडिंग को रजिस्टर में प्रविष्ट कर पोर्टल में एन्ट्री कराने के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण में जिला प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमति कविता साल्वे, मीडिया प्रभारी सुनील साहू, श्री अमित दुबे, श्री रीतेश दुबे ने की।

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