शा गृहविज्ञान महाविद्यालय में पोषण अनाज महोत्सव के अंतर्गत निबंध प्रतियोगिता का किया आयोजन
नर्मदा पुरम। पोषण अनाज महोत्सव के अंतर्गत निबंध प्रतियोगिता का आयोजन शासकीय गृहविज्ञान महाविद्यालय में आयोजित की गई। प्रतियोगिता का विषय पोषक अनाज के प्रकार एवं महत्व पर निबंध प्रतियोगिता के उपरांत कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ किरण पगारे एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. संध्या राय की उपस्थिति में एक मार्गदर्शक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन ने बताया कि पहला मोटा अनाज जिनमें ज्वार और बाजरा आते हैं। दूसरा लघु अनाज जिनमें बहुत छोटे दाने वाले मोटे अनाज जैसे रागी, कंगनी, कोदो, चीना, सांवा और कुटकी आदि आते हैं। मोटे अनाज से हड्डियों की मजबूती, कैल्शियम की कमी से बचाव, पाचन दुरुस्त करने में मदद, वजन को कंट्रोल रखने में सहायक होते है, एनीमिया का खतरा कम होता है, डायबिटीज रोगियों के लिए लाभकारी होता है, शरीर को रखता है।
इस कार्यक्रम में डॉ संध्या राय ने श्री अन्न अनाज के संबंध में छात्राओं को विस्तार से जानकारी देते हुए छात्राओं को श्री अन्न से प्राप्त होने वाले पोषक तत्व की जानकारी दी कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ किरण पगारे ने छात्राओं को बताया कि हमारे पूर्वज 60 -70 वर्ष पूर्व इन मोटे अनाजों का भरपूर प्रयोग करते थे और आज हमें प्रोटीन खनिज लवण विटामिंस की पूर्ति के लिए तथा स्वयं को रोग ग्रस्त होने से बचाने हेतु मोटे अनाज का प्रयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम की संयोजक हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ पुष्पा दुबे ने इस कार्यक्रम को सार्थक बनाने हेतु सभी का आभार व्यक्त किया तथा अपने उद्बोधन में छात्राओं से यह बात कही मोटे अनाज को गरीबों का भोजन माना जाता है, किंतु समय की आवश्यकता है कि हम इसी मोटे अनाज से स्वयं को स्वस्थ और रोग मुक्त रख सकते हैं।
हिंदी विभाग की प्राध्यापक डॉ श्रुति गोखले ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रसिद्ध कवि अज्ञेय की कविता कलगी बाजरे की का पाठ किया एवं डॉ मधु विजय ने आभार व्यक्त किया कार्यक्रम में डॉ हर्षा चचाने, डॉ. नीतू पवार, डॉ रफीक अली, डॉ. कीर्ति खरे एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही।
ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी


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