श्रीमद् भागवत कथा मित्रों को ही नहीं आहूत एवं वासुको को भी तारती है -- आचार्य पुष्कर परसाई
मन को चंचलता से मुक्त करने के लिए श्रीमद् भागवत सर्वश्रेष्ठ साधन हैं।
नर्मदा पुरम। अधिवक्ता स्व.कृष्ण कुमार पटेल की पुण्यस्मृति में बाइखेड़ी (डोलरिया) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस के अवसर पर आचार्य पुष्कर परसाई ने कहा कि पितरों के कल्याण के लिए श्रीमद् भागवत सर्वश्रेष्ठ साधन है। मन को चंचलता से मुक्त करने के लिए श्रीमद् भागवत सर्वश्रेष्ठ साधन हैं भागवत कथा पितरों को ही नहीं आहूत एवं वासुको को भी तारती है भागवत कोई मरने के बाद भी प्रेत शरीर में सुन ले तो भी उसका कल्याण हो जाता है। श्रीमद् भागवत वेदव्यास जी की अंतिम कृति है भागवत के बाद वेदव्यास जी ने अन्य किसी ग्रंथ की रचना नहीं की । भागवत में भक्ति ज्ञान वैराग्य का विशद विवेचन है वेद के सूत्रों की व्याख्या है भागवत में महाभारत का भी वर्णन है महाभारत का वर्णन करते हुए आचार्य पुष्कर परसाई ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में विधर्मी द्वारा अफवाह फैला दी गई है। महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए यह बिल्कुल गलत है महाभारत हमारा इतिहास है हमारी संस्कृति है महाभारत एक लाख श्लोको का हमारा विशाल ग्रंथ है। इतिहास को जानना है हमारी संस्कृति को समझना हो तो घरों में महाभारत अवश्य रखना चाहिए। आचार्य श्री ने कथा का विस्तार करते हुए भागवत के अंतर्गत महाभारत के प्रसंगों की सुन्दर व्याख्या की ।उन्होंने कहा कि कुछ धर्म विरोधी ताकतों ने धर्म को कमजोर करने के लिए यह भ्रम फैला रखा है कि महाभारत घर में रखने से घर में कलह होती है जबकि वस्तुतः ऐसा नहीं है क्योकि महाभारत में श्रीमद्भगवतगीता ,भीष्म स्तुति , विष्णुसहस्त्रनाम आदि स्तोत्र महाभारत में ही आते हैं। इस ग्रंथ के रचयिता वेदव्यास जी ने अपने इस अनुपम ग्रंथ में वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के रहस्योद्घटित किये गये है। कथा का समय दोपहर 1:30 से 4:30 बजे तक है कथा में वरिष्ठ अधिवक्ता एस एस पटेल , के के थापक एवं नर्मदापुरम अधिवक्ता संघ उपस्थित रहे ।आयोजक कुमार साहब पटेल ने सभी भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आग्रह किया।
खास खबर ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी


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