नर्मदा परिक्रमा से अधिक जरूरी अंतर की परिक्रमा--स्वामी स्मरण चैतन्य
जन्म से पहले भी हम नहीं थे और मृत्यु के बाद भी हम नहीं होंगे। यही बात हमें समझनी होगी कि जो हमारे अंदर है वह कौन है?
नर्मदापुरम। नर्मदा परिक्रमा से अधिक जरूरी अंतर की परिक्रमा है। खुद को समझना और अपने माता-पिता की सेवा करना अधिक सार्थक है। यह बात मणिपुर निवासी संन्यासी स्वामी स्मरण चैतन्य ने रविवार को चर्चा के दौरान कही। वे उच्च शिक्षित हैं और नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं। वर्तमान में वे हरदा जिले में नर्मदा के तट पर साधनारत हैं।
दो दिन पूर्व स्थानीय दत्त मंदिर में आए स्मरण चैतन्य ने चर्चा के दौरान समेरिटंस ग्रुप आफ स्कूल्स के डायरेक्टर डा आशुतोष शर्मा से कहा कि यह संसार ही मिथ्या है। जन्म से पहले भी हम नहीं थे और मृत्यु के बाद भी हम नहीं होंगे। यही बात हमें समझनी होगी कि जो हमारे अंदर है वह कौन है? जीवन की पूरी यात्रा ही यही है। उन्होंने कहा कि परिक्रमा कई प्रकार से लोग करते हैं। सबका अपना-अपना अनुभव होता है। यदि मां का साक्षात्कार हुआ है तो उसका प्रचार करने की किसी को क्या आवश्यकता है? स्वामी विद्यार्थियों के बीच जाकर व्याख्यान भी देते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तो वे कल मणिपुर जा रहे हैं। अगली बार जरूर स्कूल आकर बच्चों से बात करेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी

No comments:
Post a Comment