प्रेम रहित हृदय से भक्ति संभव नही - आचार्य पुष्कर परसाई
हर्षोल्लास के साथ मनाया रुक्मणी -कृष्ण विवाहोत्सव
नर्मदापुरम। विश्व ब्राह्मण महापरिषद द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह में छटवे दिन की कथा सुनाते हुए आचार्य पुष्कर परसाई ने भगवान् की बाल लीलाओं का संगीतमय वर्णन किया। गोपी गीत की व्याख्या की भगवान् श्री कृष्ण की मथुरा गमन का मार्मिक चित्रण किया। आचार्य श्री ने बताया प्रेम रहित हृदय से भक्ति संभव नही कंस वध की कथा सुनाते हुए आचार्य श्री ने बताया कि भगवान को जो जिस भाव से भजता है भगवान् वैसे ही रूप को धारण कर लेते है।
रासलीला पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जीवात्मा का परमात्मा से संयोग तथा पूर्ण कृपा प्राप्त करना ही रासलीला का उद्देश्य था। ब्रह्म और जीव का मिलन ही रास है, जो माया के आवरण से रहित शुद्ध है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के बीच हुए रासलीला से आत्मा से परमात्मा का मिलन हुआ है। ये सांसारिक मिलन नहीं बल्कि आत्मा व परमात्मा के बीच का मिलन है। आचार्य श्री ने कहा कि संकीर्ण मानसिकता से भगवान कृष्ण की लीलाये समझना असंभव है। इसके लिए मन की निर्मलता और हृदय में भक्ति होना आवश्यक है। आचार्य श्री ने बताया कि भौमासुर के पास बंदी बनाई गई सोलह हजार कन्याओं की समाज मे सम्मान बनाये रखने के उद्देश्य से भगवान ने उन सभी सोलह हजार कन्याओं से विवाह किया ।
इसके पश्चात उद्धव चरित्र का मार्मिक चित्रण करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि भक्ति प्रेम की पराकाष्ठा है। परमात्मा को ज्ञान के द्वारा जाना जा सकता है, किंतु यदि परमात्मा को पाना है तो एक मात्र साधन प्रेम ही है। नारद भक्ति सूत्र में तो नारद जी ने भक्ति को प्रेम की पराकाष्ठा बताया है ।इसके पश्चात के रुक्मणि मंगल का सुंदर वर्णन आचार्य श्री ने किया ।
इसके पश्चात आचार्य श्री पुष्कर परसाई ने रुक्मणी मंगल का सुन्दर विस्तार किया। कथा स्थल पर सभी श्रोताओं ने भक्ति भाव पूर्वक भगवान राधा कृष्ण के साथ फूलों से उत्सव मनाया। कथा में विधायक सीताशरण शर्मा , नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमति नीतू महेंद्र यादव, महेंद्र यादव , भूपेंद्र चौकसे, डॉ राजेश शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित थापक पूर्व अध्यक्ष प्रदीप चौबे ,मुकेश यादव, व्यापारी संघ के बल्ला राय, चंद्रभान सिंह, हरि शर्मा, राजेश तिवारी, अनिता दुबे, श्रीमति आशा दुबे, ममता मिश्रा, ममता शर्मा आदि सम्मिलित हुए सप्तम दिवस कथा सांय 4 बजे से 6:30 होगी तदुपरांत नर्मदा महाआरती होगी।
मनोज सोनी editor-in-chief

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