भाईयों ने भी अपने बहनों की आजीवन रक्षा का संकल्प का वचन दिया।
रक्षाबंधन का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया , राखी के भी बंधी जा रही है।
जिले में भुजरिया का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
नर्मदा पुरम। जिले भर में बहन-भाई के प्यार का पर्व रक्षा बंधन हर्षोल्लास के साथ से मनाया गया। बहनों ने अपने भाई के कलाई पर राखी बांध कर भाई के लंबी आयु की ईश्वर से कामना की। भाईयों ने भी अपने बहनों की आजीवन रक्षा का संकल्प का वचन दिया।
रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबंधन के त्यौहार को लेकर शहर में पिछले एक दो दिनों से विभिन्न बाजार क्षेत्रों में लोगों की चहल-पहल रही। रेडीमेड कपड़ा बाजार में नए कपड़े खरीदने को लेकर छोटे बच्चों के साथ-साथ बड़े लोगों में भी गजब का उत्साह देखा गया। वही मिठाई की दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। आलम यह है कि बदलते परिवेश के साथ इस त्योहार के रंग भी बदल रहे है। हल्दी, रोली, कुमकम, चंदन और गुजिया की महक वही है, पर इसे लेने और देने का तरीका नए ईजाद हो रहे है। अब समय की कमी और स्थान की दूरी के चलते भाई बहन का मिलना नहीं हो पा रहा है। तब एक-दूसरे के प्रति प्यार जताने के कई तरीके चलन में आ रहे हैं। लोग अपने भाई को ऑनलाइन राखी भेज रहे है।
गौरतलब है कि रक्षाबंधन के त्योहार की तिथि को लेकर लोगों में इस बार बहुत कंफ्यूजन में रहे। वहीं बुधवार अल सुबह एवं देर शाम को बहनों द्वारा अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी रक्षाबंधन का पर्व मनाया। वही आज गुरुवार को भी रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जा रहा है। पंडित विजय परसाई ने बताया कि रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन कम मुहूर्त होने के कारण 2 दिनों तक मनाया जाएगा। रक्षाबंधन हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है. भारत के अलावा भी विश्वभर में जहां पर भी हिंदू धर्म के लोग रहते हैं, वहां इस पर्व को भाई बहनों के बीच मनाया जाता है. राखी का त्योहार भाई और बहन के प्रेम का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं।
मालूम हो कि पंचांग और ज्योतिषाचार्यों के बीच को लेकर भी कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान दिया जाता है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल नहीं होना चाहिए। शास्त्रों और और मुहूर्त शास्त्र में भद्रा को अशुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरिया का पर्व हर्षोल्लास के साथ जिलेभर में मनाया जा रहा है। आज के दिन बड़े बुजुर्गों को भुजरिया देकर उनसे चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। उनके आशीर्वाद से हम सुख समृद्धि को प्राप्त करते हैं।
मनोज सोनी editor-in-chief



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