मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
विशेष अभियान चलाकर दिया जा रहा है निराश्रित गौवंश को आश्रय
गौशाला के अतिरिक्त अस्थायी स्थलों पर की गई है गौवंश सुरक्षा की व्यवस्था
नर्मदापुरम। निराश्रित गौवंश को आश्रय देने एवं राहगीरों को दुर्घटना से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विगत 15 दिवस से जिले में विशेष अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में चलाये जा रहे इस अभियान के तहत निराश्रित गौवंश हेतु स्थायी शासकीय गौशालाओं, निजी गौशालाओं की क्षमता का अनुसार गौवंश की उपस्थिति सुनिश्चित की गयी, साथ ही अस्थायी रूप से भी विभिन्न प्रयास किये गये है। जिसकी जानकारी देते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सोजान सिंह रावत द्वारा बताया गया कि सर्वप्रथम सभी शासकीय व निजी गौशालाओं की क्षमता का आंकलन किया गया, तत्पश्चात जिले के मुख्य मार्गों से गौशालाओं की मैपिंग करायी गयी एवं यह सुनिश्चित किया गया कि सर्वप्रथम अति व्यस्त मार्गों से गौवंश को गौशालाओं में स्थानान्तरित किया जावे।
इस हेतु जनपद स्तर से नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये एवं हॉका दल बनाये गये। जिले में कुल संचालित 41 निजी एवं शासकीय गौशालाओं, जिनकी कुल क्षमता 4980 है वहां क्षमता अनुसार गौवंश रखने के बाद भी निराश्रित गौवंश बडी संख्या में सडकों पर थे। जिस कारण अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की गयी।
सीईओ जिला पंचायत द्वारा बताया गया कि कलेक्टर सुश्री मीना के निर्देशानुसार जनपद स्तर, नगरीय निकायों व नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कर्मचारियों के सम्मिलित दल बनाये गये एवं जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया। जिले में ऐसे स्थलों का चयन किया गया जो चहुंओर बाउन्ड्री से कवर थे, जहां गौवंश हेतु चारे एवं पानी की व्यवस्था थी। तत्पश्चात जनपद पंचायतों द्वारा क्रय किये गये एवं एनएचआई के पास उपलब्ध केटल केचर व्हीकल एवं हॉका दल के माध्यम से निराश्रित पशुओं का स्थानान्तरण मुख्य मार्ग से अस्थायी चिन्हित स्थलों तक सुनिश्चित किया जा रहा है।
सीईओ जिला पंचायत श्री रावत द्वारा अवगत कराया गया कि जिले में कुल 11 अस्थायी स्थलों का चिन्हांकन निराश्रित गौवंश के आश्रय हेतु नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया है, जहां हॉका दल के माध्यम से लगातार गौवंश को भेजा जा रहा है। उक्त गतिविधी में यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि गौवंश को शिफ्टिंग के दौरान अथवा अस्थायी स्थलों पर समस्याएं न हो, अभियान मे सांसद सभी विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों का भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
जनप्रतिनिधियों द्वारा जन्माष्टमी के अवसर व अन्य अवसरों पर गौशालाओं में उपस्थित होकर गौ पूजन किये जाने व गौसेवा का संदेश दिये जाने के कारण ग्रामीणों में भी निराश्रित गौवंश को आश्रय प्रदान करने के इस अभियान में रूचि बढी है। जिले में यह अभियान सतत रूप से जारी रखा जाकर निराश्रित गौवंश के स्थायी समाधान का भी प्रयास किया जा रहा है।


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