मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
धार्मिक गीतों से सजी शाम , गायक कलाकारों ने गाए देवी भजन और गीत
नर्मदापुरम। नर्मदापुर युवा मंडल द्वारा प्रति रविवार सुरीला नर्मदापुरम संगीत कार्यक्रम लगातार जारी है। इस रविवार नर्मदापुरम की शाम धार्मिक गीतों से सजी। स्थानीय संगीत कलाकारों ने देवी भक्ति ,चैटीचांद और रमजान के गीत गाए। रविवार शाम शाम नेहरू पार्क में 40 से अधिक गायक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल हरिशंकर शर्मा मनीष परदेशी दीपक हेमनानी ने गायक कलाकारों का सम्मान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग इस सुरीली शाम में शामिल होने कार्यक्रम में पहुंचे।
इन गायक कलाकारों ने गाए धार्मिक गीत
सुरीला नर्मदापुरम संगीत कार्यक्रम में ढोलकीच्या तालावर, घंग़राच्या बोलावर - कंचन बनौधा तेरे नाम का करम है -हेमंत साहू ,लेके पूजा की थाली सीमा रैकवार ,मैं शरण तुला अम्बे माँ -प्रतिमा करकरे, तुझे कब से पुकारे तेरा लाल -वासुदेव सेन ,एकविरा आई तू डोंगरावरी -अनुजा आचार्य ,तेरे दरबार में मैया खुशी मिलती है -चंद्रप्रभा नामदेव, ये चमक ये दमक -मनोज यादव ,मैं बालक तू माता शेरावाली - कमल सिंह राजपूत, आऊंगी आऊंगी मैं अगले बरस फिर आऊंगी -भारती शुक्ला ,जवारे तोरे हरे हरे -आनंद मोहन शुक्ला ,तूने मुझे बुलाया शेरा वालिए, दे दे थोड़ा प्यार मैया तेरा क्या घट जाएगा -संजय साहा ,चलो बुलावा आया है - सरोज गुबरेले , जीना जीना जीना उड़ा गुलाल माई मेरी चुनरिया लहराए - कमल झा तू कितनी प्यारी है तू कितनी भोली है -दीपक केवट ,पग पग ठोकर खाऊं -संजीव सक्सेना ,नवरी नटली बाईग सुपारी फुटली - मोनल हर्णे , धरती गगन में होती है - माधवी दुबे , मन लेके आया माता रानी के भवन में -रक्षा श्रीवास्तव ,नन्हे नन्हे पांव मेंरे ऊंचा पर्वत तेरा तरुण देव मैं हूँ दासी तेरी दातिये -राखी रोहर भोर भई दिन -डॉ नैना सोनी मा मनसा मेरी लाज -राजीव रोहर आया तेरे दर पे दीवाना - रीतेश साहू, चेतन, मुबारक हो तुम सबको हज का महीना - शाहिद खान सुख के सब साथी - सचिन गौर, हे राजाराम तेरी आरती उतारू प्रकाश करकरे मेरी मां के बराबर कोई नहीं -आशीष शुक्ला ,समय को भरोसो कोनी -तन्मय यादव ,मां मेरी मां से - हरीश माँझी लाली-लाली लाल चुनरिया कैसे न मां को भाए - संगीता चौहान मां मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी - हिमांशी परिता ,दमादम मस्त कलंदर -निकिता वरयानी, पंखिड़ा ओ पंखिड़ा कल्पना कहार , मां शारदा भवानी बैठी है अलभ्या लालझूले लालझूले लाल झूलेलाल सूरज तलरेजा ने सुंदर गीतों की प्रस्तुति दी। संप्रभु सोनकिया ने कविता पाठ किया।

No comments:
Post a Comment