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Thursday, 17 October 2024

सच्ची जनसेवक थीं, लोकमाता अहिल्याबाईः प्रमोद शर्मा श्री शर्मा ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए


 मनोज सोनी एडिटर इन चीफ


सच्ची जनसेवक थीं, लोकमाता अहिल्याबाईः प्रमोद शर्मा

श्री शर्मा ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए


नर्मदापुरम। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर एक महारानी न होकर सच्ची लोकसेवक थीं। इतिहास में संभवतः वे इकलौती ऐसी शासक थीं, जिनके जनकल्याणकारी कार्य अपने राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं थे। उन्होंने अपने राज्यकाल के दौरान समूचे देश में एक समान विकास कार्य कराए। इसीलिए वे अपने समकालीन और पूर्ववर्ती शासकों से एकदम अलग और विलक्षण थीं। यह बात समेरिटंस स्कूल सांदीपनी परिसर में सुबह की प्रार्थना सभा में शुक्रवार को प्रमोद शर्मा ने पुण्य श्लोका माता अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कही। 

महारानी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वे एक संवेदनशील शासिका होने के साथ ही कुशल रणनीतिकार, साहसी योद्धा और दूरदर्शी व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बनारस, पुरी, द्वारिका, सोमनाथ, रामेश्वरम, बद्रीनाथ धाम सहित अन्य स्थलों पर मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ही धर्मशालाएं आदि बनवाई। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जनसुविधा के लिए रोड भी बनवाए। 

श्री शर्मा ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने महिलाओं के हित में कई कानून बनाए। महिलाओं के मामले वे स्वयं एकांत में सुनती थी। किसानों के लिए आर्थिक सहायता देने जैसे कल्यणकारी कार्य किए। वे स्वयं को शासक न मान कर भगवान शंकर का प्रतिनिधि मानती थी। उनकी सभी राजाज्ञाओं में नीचे हस्ताक्षर के स्थान पर श्री शंकर ही लिखा होता था, उनकी न्यायप्रणाली बहुत ही पारदर्शी थी। उन्होंने अपने राज्य में त्रिस्तरीय न्याय प्रणाली की स्थापना की। 

उन्होंने वर्ष 1755 से 1795 तक मालवा में शासन किया। इस दौरान राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने के अतिरिक्त उन्होंने राज्य में कला, संस्कृति और व्यवसाय को बढ़ाने के लिए कई क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कार्य किए। वे वास्तव में उच्च स्तर की महारानी होने के साथ ही एक संवेदनशील महिला थीं। उनके चरित्र और आदर्शो में अपने जीवन में अपनाना चाहिए। कार्यक्रम में डायरेक्टर डा आशुतोष शर्मा, प्राचार्य श्रीमती प्रेरणा रावत, राजेंद्र रघुवंशी सहित अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित थे।


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