जिला अस्पताल में अलग नहीं है कैदी वार्ड, टीबी मरीजों के साथ भर्ती करने से बंदियों में संक्रमण का खतरा अलग-अलग बीमारी के मरीज एक ही वार्ड में किया जा रहे एडमिट हर साल बजट आने के बाद भी बुरे हाल - AKN News India

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Saturday, 15 March 2025

जिला अस्पताल में अलग नहीं है कैदी वार्ड, टीबी मरीजों के साथ भर्ती करने से बंदियों में संक्रमण का खतरा अलग-अलग बीमारी के मरीज एक ही वार्ड में किया जा रहे एडमिट हर साल बजट आने के बाद भी बुरे हाल


 

जिला अस्पताल में अलग नहीं है कैदी वार्ड,

टीबी मरीजों के साथ भर्ती करने से बंदियों में संक्रमण का खतरा

अलग-अलग बीमारी के मरीज एक ही वार्ड में किया जा रहे एडमिट

हर साल बजट आने के बाद भी बुरे हाल


नर्मदापुरम। अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं के मामले में प्रदेश भर में अपनी पहचान बने चुके नर्मदापुरम के जिला अस्पताल को हर साल सरकार की ओर से मोटी राशि सुविधाओं के विस्तार के लिए मिलती है लेकिन स्थिति यह है कि सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की बजाए कमी होती जा रही है। बजट मिलने के बाद भी आलम यह है कि अस्पताल में कैदियों के इलाज के अलग से कोई वार्ड नहीं है। जिला अस्पताल से आने वाले कैदियों को जनरल वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ भर्ती किया जाता है। इनमें टीबी के मरीज भी होते हैं। टीबी मरीजों के साथ कैदियों को भर्ती किए जाने से जेल में बंद कैदियों को भी क्षय संक्रमण का खतरा हो सकता है।

गौरतलब है कि लोगों का कहना है कि टीबी छुआछूत  की बीमारी है, मरीज के संपर्क में या आसपास रहने वाले किसी भी व्यक्ति को यह हो सकती है। मरीज के छींकने, खांसने या उसके संपर्क में रहने से क्षय का संक्रमण फैलता है और यही खतरा कैदियों को क्षय रोगियों के साथ भर्ती किए जाने वाले कैदियों में है और उनके संपर्क में  रहकर जेल में रहने वाले अन्य कैदियों में इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

मुलजिम के लिए कैदी वार्ड नहीं है अलग

जिला अस्पताल में अलग से मुलजिम के लिए वार्ड नहीं है। गंभीर मरीजों के साथ ही इन्हें रखा जाता है और उसकी सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी भी उसके साथ ही रहते हैं जो स्वस्थ होते हैं परंतु उनके साथ रहकर बीमार हो जाते हैं। वर्तमान में टीवी पेशेंट , कैंसर पेशेंट एवं अन्य गंभीर बीमारियों के पेशेंट एक ही साथ एक ही जनरल वार्ड में रखे जा रहे है।

अलग वार्ड न होने से अन्य मरीजों को दिक्कत

जेल से भर्ती के लिए आने वाले कैदियों के साथ पुलिस तैनात  रहती है जिसके कारण दूसरे मरीजों को परेशानी होती है। कैदियों को टीबी मरीज के पलंग के पास भर्ती किया जाता है, पुलिस कर्मी कैदी के साथ रहते हैं ऐसे में सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों को भी टीबी या अन्य  बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। 

बिना दरवाजे का टायलेट, पर्दा डालकर चल रहा काम

अस्पताल की अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि वार्ड के टायलेट में दरवाजा तक नहीं है। यहां कपड़े के पर्दा डालकर काम चलता है। भर्ती मरीजों के साथ महिला अटेंडर भी रहते हैं, उन्हें बिना दरवाजे के टायलेट का उपयोग करना पड़ता है। पूर्व में पुलिस कर्मचारियों और मुलजिम के लिए एक अलग कमरा और लैटिन बाथरूम थी जिस पर ऑफिस अस्पताल के स्टाफ ने कब्जा करके रखा हुआ है।


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