मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
श्रीरामलीला महोत्सव में सीताहरण की लीला सम्पन्न
नर्मदा पुरम। श्रीरामलीला महोत्सव में सीताहरण की लीला सम्पन्न, श्रीराम लीला में दिखाया कि श्रीराम,जानकी और लक्ष्मण चित्रकूट पहुंचतें हैं मार्ग में अत्रि मुनि के आश्रम में जातें है वहां ऋषिपत्नी अनसूया सीताजी को अपने पास बैठाकर धर्म-कर्म की बातें समझाकर उन्हें दिव्यवस्त्र आभूषण भेंट करतीं हैं ।
आगे चलकर श्रीरामजी की भेंट शरभंग ऋषि से होती है पश्चात वन में ऋषि मुनियों के आश्रम में श्रेष्ठ मुनियों के समूह उनको हड्डियों का ढेर दिखलातें हैं ये देखकर श्रीरामजी अपनी दोनों भुजाएं उठाकर प्रण करतें हैं कि मैं पृथ्वी को राक्षसों से रहित कर दूंगा ।
श्रीरामजी ,जानकीजी और लक्ष्मण जी दण्डक वन में पंचवटी आश्रम में रहने लगतें हैं तभी वहां एक दिन रावण की बहन शूर्पणखा अपना भेष बदल कर आती है ,लक्ष्मणजी उसके नाक कान काटकर मानों रावण को चुनोती दे देते हैं ,फिर नाक कान कटी हुई शूर्पणखा अपने भाई रावण के पास पहुंचकर बतलाती है कि उसकी यह दशा श्रीराम ने की है और खर दूषण आदि का भी वध कर दिया है तब रावण विचार करता है क्योंकि ताड़का सुबाहु खर और दूषण आदि सभी रावण जितने ही बलशाली थे तब वह मारीच के पास जाता है और षड़यंत्र कर उसे स्वर्ण मर्ग बनाकर पंचवटी में ले जाता है जहां सीताजी श्रीरामजी से स्वर्ण मृग को लाने कहतीं है श्रीराम जी उसके पीछे जातें है, आश्रम को सूना देखकर राक्षस राज रावण साधु का भेष बनाकर 'भड़िहाई जैसा आता है और सीताजी का हरण कर रथ में बैठाकर आकाश मार्ग से ले जा रहा होता है तभी आकाश में उसका युद्ध गीधराज जटायु से होता है जहाँ रावण उसके पंख काट देता है ,मारीच का वध करने के बाद जटायु श्रीरामजी को बतलातें है कि रावण सीताजी का हरण करके दक्षिण दिशा की ओर ले गया है ,श्रीराम जी सीता जी की खोज में आगे निकलतें हैं ।
लीला के मंचन में अमित यदुवंशी ने सूर्पनखा ,सुभाष परसाई ने रावण दीपेश व्यास ने खर -दूषण, मनोज दुबे ने अत्रि और अनसूया का मनोज परसाई ने ,राक्षसी शूर्पणखा का अरुण तिवारी ,सुतीक्ष्ण और मारीच की भूमिका गोपाल शुक्ला ने की ।

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