मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
कलेक्टर के निर्देशानुसार शोभापुर क्षेत्र में चलाया गया बाल श्रम रोकथाम हेतु संयुक्त जन-जागरूकता अभियान,
ढाबा-होटलों एवं दुकानों का किया गया निरीक्षण
नर्मदापुरम// बाल श्रम की पहचान एवं विमुक्ति की कार्यवाही के उद्देश्य से गुरुवार को शोभापुर स्थित ढाबा-होटल एवं अन्य व्यावसायिक संस्थानों में संयुक्त जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान श्रम विभाग के नेतृत्व में पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के सहयोग से संचालित किया गया।
अभियान के दौरान संस्थानों में बाल श्रम रोकथाम संबंधी स्टीकर लगाए गए तथा नियोजकों को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। निरीक्षण के समय यह स्पष्ट किया गया कि 14 वर्ष तक के बालकों का किसी भी प्रकार के कार्यों में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। साथ ही 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक श्रेणी के कार्यों—जैसे खाने, ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटकों एवं अन्य परिसंकटमय प्रक्रियाओं—में नियोजन करना कानूनन अपराध है।
अधिकारियों द्वारा बताया गया कि बालक के किसी भी संस्थान में नियोजन एवं किशोर श्रमिकों का खतरनाक उद्योगों में नियोजन संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। उल्लंघन पाए जाने पर दोषी नियोजक को न्यूनतम 6 माह से अधिकतम 2 वर्ष तक का कारावास अथवा न्यूनतम 20,000 से अधिकतम 50,000 तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जाने का प्रावधान है।

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