मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के चौथे दिन व्यासगादी से विभीषण शरणागति केंद्रित आध्यात्मिक सभा को किया संबोधित
नर्मदा पुरम। पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के चौथे दिन व्यासगादी से विभीषण शरणागति केंद्रित आध्यात्मिक सभा को संबोधित करते हुए भागलपुर बिहार से पधारी मानस कोकिला श्रीमती कृष्णा देवी मिश्र ने कहा कि सत्संग के यह क्षण अत्यंत दुर्लभ हैं। जो केवल भगवान की कृपा से ही मिलते हैं। आपने भगवान और भक्त की मंगलमय मिलन की कथा जो विभीषण जी की श्री राम से मिलने की यात्रा है, का शुभारंभ करते हुए कहा कि विनय पत्रिका में जीव की जीवन यात्रा का वर्णन किया गया है। और विभीषण जी की तुलना जीव से की गई है। यहां रावण मोह और कुंभकरण अहंकार का प्रतीक है।
आपने श्रीमद् भागवत में भगवान शंकर द्वारा मां पार्वती को कथा सुना ने के प्रसंग का सविस्तार वर्णन किया और बताया कि शुकदेव जी ने भी इस अमर कथा को सुना। विभीषण जी के पास माला, मंदिर, भक्ति सब कुछ था किंतु भरोसा नहीं था ।फिर हनुमान जी के आने से भरोसा आ जाता है। इसी भरोसे के सहारे हुए वे रावण की सभा से अपमानित होकर जब चलने लगते हैं तब भी वह रावण के हित और कल्याण की बात करते हैं। किंतु रावण जैसे ही उनको लात मार कर भगाता है वैसे ही वह अभागा हो जाता है ।
स्वयं भगवान शंकर कहते हैं कि साधु का अपमान करने से संपूर्ण कल्याण की हानि होती है। यहां विभीषण जी अत्यंत खुश होकर मन में अनेक कल्पनाएं करते हुए श्री रघुनाथ जी के पास जाने की यात्रा प्रारंभ करते हैं वे सोचने लगते हैं मैं जाकर भगवान के कोमल और लाल वर्ण के सुंदर चरण कमल का दर्शन करूंगा, जो सेवकों को सुख देने वाले हैं, जिन चरणों का स्पर्श पाकर ऋषि पत्नी अहिल्या तर गई और जो दंडक वन को पवित्र करने वाले हैं, जिन चरणों को जानकी जी ने हृदय में धारण कर रखा है जो कपट मृग के पीछे दौड़े थे और जो चरण कमल साक्षात शंकर जी के हृदय में विराजते हैं वह चरण मैं स्वयं देखूंगा।
आपने कहा कि नारद भक्ति सूत्र के अनुसार भक्ति के सारे लक्षण मारीच में विद्यमान है । कार्यक्रम के प्रारंभ में मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक डॉ सीताशरण जी शर्मा के साथ अरुण शर्मा पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह राजपूत एसपीएम के मुख्य महाप्रबंधक व्यंकटेश शर्मा अधिवक्ता मनोज चौरे, मुकेश श्रीवास्तव ने श्रीमती कृष्णा देवी का पुष्प हार से स्वागत किया। भजन अंजलि के अंतर्गत कुमारी सुरभि वशिष्ठ द्वारा भजन की प्रस्तुति की गई, हारमोनियम पर राम परसाईं, तबले पर सक्षम पाठक एवं गिटार पर यश मालवीय द्वारा सहयोग किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रीमती कृष्णा देवी के सुप्रसिद्ध शयन पद नैनों में नींद भर आई से हुआ।

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