हिन्दू सनातन संस्कृति अनुसार अक्षय तृतीया का महत्व, सोना खरीदने का मुहूर्त और क्या दान करें दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है वैशाख शुक्ल तृतीया आज के दिन सोना खरीदने का अत्यधिक शुभ माना जाता है अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं बल्कि अहंकार का विसर्जन करना भी प्रमुख है - AKN News India

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Monday, 20 April 2026

हिन्दू सनातन संस्कृति अनुसार अक्षय तृतीया का महत्व, सोना खरीदने का मुहूर्त और क्या दान करें दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है वैशाख शुक्ल तृतीया आज के दिन सोना खरीदने का अत्यधिक शुभ माना जाता है अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं बल्कि अहंकार का विसर्जन करना भी प्रमुख है

 

एके एन न्यूज नर्मदा पुरम 
 

हिन्दू सनातन संस्कृति अनुसार अक्षय तृतीया का महत्व, सोना खरीदने का मुहूर्त और क्या दान करें 

दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है 

वैशाख शुक्ल तृतीया आज के  दिन सोना खरीदने का अत्यधिक शुभ माना जाता है

अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं बल्कि अहंकार का विसर्जन करना भी प्रमुख है


नर्मदा पुरम। वैशाख मास शुक्ल पक्ष पंडितों के अनुसार तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व आत्मिक उन्नति, धर्म, सेवा और सद्कर्म की कभी न समाप्त होने वाली परंपरा का स्मरण कराता है। हिन्दु सनातन संस्कृति परंपरा में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं, जो कि जीवन-दर्शन का हमें जीवंत संदेश देती हैं। ऐसी ही एक तिथि है अक्षय तृतीया। जिसे आखा तीज या अक्ती के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस दौरान अक्षय शब्द का शाब्दिक अर्थ है कभी क्षय ना हो, अर्थात् जो सदा रहे, जो अनंत हो। यही कारण है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना गया है। 

 मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि कालचक्र के परिवर्तन की साक्षी है। पौराणिक कथाओं और इतिहास के अनुसार इस दिन निम्नलिखित चीजें घटित हो चुकी हैं। हिंदू समय गणना के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग का समापन हुआ था और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम का प्राकट्य इसी तिथि को हुआ था। भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान, सूर्यदेव ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नाश किया था। पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया आज के  दिन सोना खरीदने का अत्यधिक शुभ माना जाता है।

अक्षय तृतीया की विशेषता यह है कि इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। अर्थात् इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए कोई मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस अवसर पर विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नया व्यापार आरंभ, वाहन क्रय, आभूषण खरीदना जैसे सभी कार्य इस दिन स्वतः सिद्ध माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्ष में कुछ ही तिथियाँ ऐसी होती हैं जो समस्त अशुभ प्रभावों से मुक्त मानी जाती हैं, और अक्षय तृतीया उनमें से एक है। 

अक्षय तृतीया पर दान का महत्व भौतिक सुखों से कहीं अधिक है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन किया गया दान जातक के संचित पापों का क्षय करता है अर्थात् अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान और अर्जित किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। सनातन परंपरा में ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से धन का ह्रास नहीं होता बल्कि दान से धन-संपदा में वृद्धि होती है।अन्नदानम् परं दानम् अर्थात् अन्न को धार्मिक ग्रंथों में परब्रह्म कहा गया है। अक्षय तृतीया पर किसी भूखे को भोजन कराना साक्षात नारायण की सेवा के समान है। ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ होने के कारण इस दिन सत्तू, गुड़ और शीतल जल के दान का विशेष महत्व है।प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ी मानवता है। इस दिन मिट्टी के घड़े (कुंभ) में जल भरकर दान करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।वस्त्र दान:निर्धनों को तन ढकने के लिए वस्त्र गौदान करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस तपती धूप में राहगीरों को जूते या चप्पल दान करना पुण्य होता है।

अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं बल्कि अहंकार का विसर्जन है। यह आत्मा को निर्मल करता है और कर्मों की श्रृंखला में ऐसे बीज बोता है, जिनका फल जन्म- जन्मांतर तक अक्षय रहता है इस पावन दिवस पर निम्न धार्मिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं भगवान श्री लक्ष्मी नारायण की विधि विधान पूर्वक पूजा धन के देवता कुबेर की पूजा गंगा या अन्य पवित्र तीर्थों में स्नान दान हवन  पूजन स्वर्ण आभूषण, विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य एवं जरूरतमंदों को दान करें और पुण्य फल प्राप्त करें।

लेख आखातीज विशेष साभार

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