पिपरिया में आशा भुगतान घोटाले की जांच में लीपापोती का आरोप अजाक्स जिलाध्यक्ष ने एनएचएम की गाइडलाइन अनुसार पुनः जाँच करने की मांग की और दोषी अफसरों पर एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी - AKN News India

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Friday, 22 May 2026

पिपरिया में आशा भुगतान घोटाले की जांच में लीपापोती का आरोप अजाक्स जिलाध्यक्ष ने एनएचएम की गाइडलाइन अनुसार पुनः जाँच करने की मांग की और दोषी अफसरों पर एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी


 एके एन न्यूज नर्मदा पुरम


पिपरिया में आशा भुगतान घोटाले की जांच में लीपापोती का आरोप

अजाक्स जिलाध्यक्ष ने एनएचएम की गाइडलाइन अनुसार पुनः जाँच करने की मांग की

और दोषी अफसरों पर एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी 


पिपरिया/ नर्मदापुरम। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरिया में आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच में लीपापोती का आरोप लगाते हुए मप्र अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ अजाक्स ने दोषी अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की।

अजाक्स जिलाध्यक्ष रविशंकर बाल्मीक ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल, मिशन संचालक एनएचएम, कलेक्टर और सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर एनएचएम की गाइडलाइन अनुसार दोषी बीपीएम, डीसीएम, डीपीएम, बीएएम व बीएमओ पर FIR दर्ज कर शासकीय राशि की वसूली की मांग की है। संघ का आरोप है कि असली दोषियों को बचाकर एक निर्दोष एससी वर्ग के आउटसोर्स ऑपरेटर को नौकरी से हटा दिया गया।

*क्या है पूरा मामला*  

रविशंकर बाल्मीक ने जानकारी देते हुए बताया कि 20 जनवरी 2022 को प्रभारी मंत्री की दिशा बैठक के निर्देश पर एसडीएम पिपरिया से जांच कराई गई थी। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2022 में 175 आशा कार्यकर्ताओं को 3.65 लाख रुपए का अधिक भुगतान किया गया। प्रभारी बीसीएम दीपक सुरजिया ने आशा पत्रकों में कांट-छांट कर भुगतान राशि बढ़ाई।

*बीएमओ की आईडी से हुआ खेल*  

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दीपक सुरजिया ने फरवरी 2022 में डीसीएम शैलेन्द्र शुक्ला से साठगांठ कर बीएमओ की आईडी पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करवा लिया। इससे बीएमओ की ओटीपी सीधे सुरजिया को मिलने लगी और वह बिना बीएमओ की अनुमति के भुगतान फाइल अप्रूव करने लगा। एसडीएम की जांच में डीसीएम शैलेन्द्र शुक्ला ने यूजरनेम-पासवर्ड में मदद करना स्वीकार भी किया।


*निर्दोष पर गिरी गाज, दोषी बचे*  

अजाक्स का आरोप है कि तत्कालीन डीपीएम दीपक डेहरिया, डीसीएम शैलेन्द्र शुक्ला और बीसीएम दीपक सुरजिया ने एनएचएम भोपाल के अधिकारी से मिलीभगत कर मामले को दबाया। दोषियों को बचाकर अनुसूचित जाति वर्ग के आउटसोर्स ऑपरेटर को नौकरी से हटा दिया गया, जबकि उसे 2022- 23 में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी मिला था।


*जांच टीम पर उठाए सवाल*  

संघ ने एसडीएम द्वारा गठित जांच टीम पर भी सवाल खड़े किए। आरोप है कि टीम में स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तर के अनुभवी अधिकारियों को शामिल न कर एक एमपीडब्ल्यू, बीएएम, जिनके द्वारा खुद ई-वित्त से फर्जी भुगतान किया गया है, और पूर्व में कबाड़ा कांड में दोषी पाए गए एलडीसी व प्रभारी लेखापाल को शामिल किया गया। इससे जांच एनएचएम की गाइडलाइन के अनुसार नहीं हो पाई और दोषी बच गए।

*नवीन जाँच टीम गठित कर 2013 से वर्तमान तक जांच की उठी मांग*  

अजाक्स ने मांग की है कि 2013 से जनवरी 2026 तक सभी आशा वाउचर की जाँच के साथ ही टीबीआई, पीबीआई भुगतान और अधिकारियों के खातों की गहन जांच कराई जाए। आरोप है कि आशाओं और सीएचओ के खाते में अधिक राशि डालकर बाद में वापस ली जाती थी। साथ ही खुद के खातों में भी फर्जी कोविड, प्रशिक्षण, टीए-डीए का भुगतान किया गया।

*उग्र आंदोलन की चेतावनी*  

संघ ने चेतावनी दी है कि एक माह का अल्टीमेटम देने के बाद भी पुनः जांच नहीं की जा रही है। यदि जल्द दोषी बीपीएम, बीसीएम, बीएमओ, डीसीएम, डीपीएम, बीएएम पर FIR दर्ज कर राशि वसूली नहीं की गई और निर्दोष आउटसोर्स ऑपरेटर को बहाल नहीं किया गया तो संघ उग्र आंदोलन करेगा और हाईकोर्ट जाएगा। इसकी पूरी जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी। अजाक्स का कहना है कि जांच न होने से स्पष्ट है कि इसमें बड़े अधिकारियों की संलिप्तता है। यह मामला जिले में जनचर्चा का विषय बना हुआ है।

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