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Sunday, 16 June 2024

प्रदेश के राजमार्गों एवं सड़कों पर मौजूद निराश्रित गौवंश के प्रबंधन के लिए संबंधित विभाग तत्पर रहें : प्रमुख सचिव पशुपालन


 

प्रदेश के राजमार्गों एवं सड़कों पर मौजूद निराश्रित गौवंश के

प्रबंधन के लिए संबंधित विभाग तत्पर रहें : प्रमुख सचिव  पशुपालन


नर्मदापुरम। प्रदेश के राजमार्गों एवं सड़कों पर मौजूद निराश्रित गौवंश के प्रबंधन के संबंध में राजमार्गों एवं सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गौवंश की वजह से कृषकों की फसलों को होने वाले नुकसान तथा दुर्घटनाओं की वजह से होने वाली जन-धन एवं पशुधन की हानि की रोकथाम एवं गौवंश के संरक्षण हेतु उन्हें उचित स्थान पर व्यवस्थापन हेतु निराश्रित गौवंश को स्थानीय निकायों तथा राजमार्ग पैट्रोलिंग वाहनों द्वारा निकटतम गौशालाओं में पहुँचाने की व्यवस्था करना। 

प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सभी कलेक्‍टर्स को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश को ग्राम पंचायतें अपने संसाधनों से निराश्रित गौवंश को हांक कर अथवा स्थानीय परिवहन व्यवस्था के माध्यम से निकटतम गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है। नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध निराश्रित गौवंश के परिवहन हेतु हाइड्रोलिक/स्थानीय वाहनकी व्यवस्था नगर निगम/नगरीय निकाय/जिला माईनिंग फंड आदि में उपलब्ध राशि से व्यवस्था की जा सकती है। 

राजमार्गों पर विचरण करने वाले निराश्रित गोवंश की राजमार्ग संधारण संस्था के पेट्रोलिंग वाहन से सतत निगरानी की जावे एवं सड़को पर विचरण करते निराश्रित गोवंश को निकटतम गौशालाओं/गोठानों तक परिवहन हेतु राजमार्ग संधारण संस्था के हाइड्रोलिक/स्थानीय वाहन की व्यवस्था की जा सकती है। सड़को एवं राजमार्गों से इस प्रकार से परिवहन कर निकटतम गौशालाओं/ गोठानों पर पहुंचाये गये अतिरिक्त निराश्रित गौवंश हेतु चारे-भूसे आहार की राशि मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों के माध्यम से रू. 20/- प्रति गोवंश प्रतिदिवस के मान से उपलब्ध कराई जा सकती है।

 निराश्रित गोवंश ग्रामों से निकलकर सड़कों तथा राजमार्गों तक न पहुंचे इस हेतु गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण तथा जहां गौशाला नहीं हैं वहां अस्थाई गौशालाओं/ गोठानों की सटीक व्यवस्था आवश्यक हैं। ग्राम स्तरीय गोठान लगभग 100 गौवंश हेतु लगभग 1 एकड़ ऐसी भूमि की आवश्यकता होगी। ग्राम स्तरीय गोठान ऐसी जगह बनाए जा सकते हैं जहां पानी का भराव न हो, जहां वन भूमि/चराई हेतु लगभग 5-10 एकड़ भूमि गोठान के नजदीक उपलब्ध हों (अन्यथा चारा भूसे के लिए अधिक व्यवस्था की आवश्यकता होगी), पेयजल हेतु नजदीक में तालाब अथवा नदी हों, इत्यादि।

 गोठान भूमि की यथासंभव स्थाई अस्थाई फेंसिंग कराई जा सकती है। "ग्राम स्तरीय गोठानों "के निराश्रित गोवंश हेतु चारे-भूसे आहार की राशि मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों के माध्यम से पंजीयन पश्चात रू. 20/- प्रति गोवंश प्रतिदिवस के मान से उपलब्ध कराई जा सकती है। वन क्षेत्रों में चराई हेतु निराश्रित गोवंश को भेजने के संबंध में वन विभाग से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। उक्त गोठानों का संचालन स्थानीय निकायों/स्थानीय निकायों द्वारा चयनित सेवा भाषी गैर शासकीय संगठनों/ स्व सहायता समूहों द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक जिले में "जिला स्तरीय गौठान" की व्यवस्था करना। 

जिला स्तरीय गोठान लगभग 1000 गोवंश की क्षमता के स्थापित किये जा सकते हैं। इस हेतु प्रत्येक 100 निराश्रित गौवंश हेतु 1 एकड़ भूमि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुये लगभग 1000 गौवंश हेतु लगभग 10 एकड़ ऐसी भूमि की आवश्यकता होगी। जिला स्तरीय गोठान ऐसी जगह बनाए जा सकते हैं जहां पानी का भराव न हो, जहाँ वन भूमि/चराई हेतु लगभग 50-100 एकड़ भूमि गोठान के नजदीक उपलब्ध हों, पेयजल हेतु नजदीक में तालाब अथवा नदी हों, इत्यादि। गोठान भूमि की यथासंभव स्थाई/अस्थाई फेंसिंग कराई जा सकती है। गौठान के निर्माण में मनरेगा/अन्य उपयुक्त मद/ मनरेगा योजना अंतर्गत अप्रारंभ गौशालाओं की स्वीकृति को आवश्यकता अनुसार निरस्त कर "जिला स्तरीय गोठान"के कार्य स्वीकृत किये जा सकते है।"

 जिला स्तरीय गोठानों के निराश्रित गोवंश हेतु चारे-भूसे आहार की राशि मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड द्वारा जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों के माध्यम से पंजीयन पश्चात रू. 20/- प्रति गोवंश प्रतिदिवस के मान से उपलब्ध कराई जा सकती है। वन क्षेत्रों में चराई हेतु निराश्रित गोवंश को भेजने के संबंध में वन विभाग से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करे। उक्त गोठानों का संचालन जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों द्वारा चयनित सेवा भावी गैर शासकीय संगठनों/स्व सहायता समूहों द्वारा किया जा सकता है। निराश्रित गौवंश की समस्या से कृषकों की फसलों एवं राजमार्गों पर विचरण करने वाले गौवंश एवं जनमानस को होने वाली हानि के निराकरण हेतु आवश्‍यक प्रयत्न करें।

मनोज सोनी एडिटर इन चीफ


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