पत्रकारिता की बहु आयामी क्षेत्र में मिला "डॉक्टरेट" की उपाधि का* *परिवर्तन योगेश" - संस्थान के "संस्थापक"- एवं काशी हिंदी "विद्यापीठ" - के राष्ट्रीय "उप कुलपति" - द्वारा वरिष्ठ पत्रकार मनोज दुबे को "विद्या वाचस्पति" मानद "डॉक्टरेट" - उपाधि से नवाजा जाएगा* - AKN News India

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Wednesday, 9 July 2025

पत्रकारिता की बहु आयामी क्षेत्र में मिला "डॉक्टरेट" की उपाधि का* *परिवर्तन योगेश" - संस्थान के "संस्थापक"- एवं काशी हिंदी "विद्यापीठ" - के राष्ट्रीय "उप कुलपति" - द्वारा वरिष्ठ पत्रकार मनोज दुबे को "विद्या वाचस्पति" मानद "डॉक्टरेट" - उपाधि से नवाजा जाएगा*


 मनोज सोनी एडिटर इन चीफ


*पत्रकारिता की बहु आयामी क्षेत्र में मिला "डॉक्टरेट" की उपाधि का*

*परिवर्तन योगेश" -  संस्थान के "संस्थापक"- एवं काशी हिंदी "विद्यापीठ" - के राष्ट्रीय "उप कुलपति" - द्वारा वरिष्ठ पत्रकार मनोज दुबे को "विद्या वाचस्पति" मानद "डॉक्टरेट" - उपाधि से नवाजा जाएगा*

    *दशकों राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जा चुके श्री दुबे को इन्टरनेशनल आईकांन अवार्ड सहित "लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज के साथ विद्या वाचस्पति मानद सम्मान डॉक्टरेट की उपाधि से विभूषित किया जाएगा*

          *पचमढ़ी की माटी में जन्मे पिता वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय श्री महेंद्र कुमार जी दुबे की शिक्षा और संस्कार का परिणाम रहा ,1982 के दशक से पत्रकारिता का दामन थामा, और पत्रकारिता और लेखन क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका के चलते ही उन्होंने सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से ही अपनी शानदार मौलिक रचना लघु शोध ग्रंथ पुस्तक "आधुनिक काल की हिंदी पत्र पत्रिकाओं का मूल्यांकन परक अध्ययन पुस्तक लिखी" - इसी के साथ ही सागर यूनिवर्सिटी डाक्टर सर हरिसिंग गौर विश्वविद्यालय से ही एम.ए.की डिग्री हासिल करने के साथ "पचमढ़ी - जिसे देश में प्रकृति का वरदान माना जाता है प्रकृति पुरुष ने इसे अपने गैर कामों को छोड़कर जिस ढंग से सजाया और संवारा है, वैसा सौभाग्य शायद ही किसी पर्यटन स्थल को नसीब होना बड़े सौभाग्य की बात है , मन की उर्वरा भूमि में बचपन से ही इसका प्रभाव अनूठे ढंग से मन पर पड़ा फिर क्या था , श्री दुबे ने कलम उठाई और देश के नामी गिरामी अखबार में "पहल और पहुंच की मोहताज पचमढ़ी का नहीं हुआ विकास धारावाहिक आर्टिकल जब लगभग दो माह प्रकाशित हुये, तब प्रशासन और सरकार के हाथ पैर फूलने लगे लगातार दबाव बनाया जा रहा था लेकिन कुछ कर गुजरने की तमन्ना और पचमढ़ी की हो रही दुर्दशा देखी नहीं जा रही थी उन्होंने अपनी कलम से मानों सरकार और प्रशासन का रुख ही बदल दिया*

    *लेकिन अब शनै शनै पचमढ़ी का और पचमढ़ी की फिजा का मानों रुख बदलने लगा है, और मौसम के मिजाज में भी लगातार अंतर आता जा रहा है पचमढ़ी में जिसकी लाठी उसकी भैंस रसूखदारों  और नेताओं ने  इसकी फिजा को ही बदल दिया है और इसे यहीं विकास कहते हैं*

      *राजनेता उच्च अधिकारियों इसे अपना ऐशगाह बना रखा है*

*जिसकी चर्चे नगर में होती है*

*यदि इस पर केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से शक्ति नहीं लगे तो वह दिन दूर नहीं होंगे जब पचमढ़ी एक समय भूतों के देने नजर आएंगे क्या हम जितना रोजाना इस प्रकृति से ले रहे हैं उसका कोई अंश भी हम भूल कर भी लौटने का प्रश्न करते हैं कभी नहीं*

        *श्री मनोज दुबे वरिष्ठ पत्रकार अपनी बाल्या अवस्था में ही जब पहली बार प्रदेश के राज्यपाल डाक्टर भाई महावीर प्रसाद जी आये, तब श्री दुबे की हैंडराइटिंग देखकर बहुत प्रभावित हुए जिस स्थान से महामहिम राज्यपाल को जाना था वहीं कुछ दूर पर मनोज दुबे अपनी पुस्तक पचमढ़ी से संबंधित लिख रहे थे , महामहिम राज्यपाल डाक्टर भाई महावीर ने देखा और पास आकर बैठ गये ,, कहां भाई क्या लिख रहे हो तब मैंने बताया कि पचमढ़ी के इतिहास , भूगोल और यहां के पर्यावरण के बारे में पुस्तक लिख रहा हूं उन्होंने पुस्तक को हाथ मिला और सबसे पहले कहां की इतनी सुंदर हैंडराइटिंग कुछ पृष्ठ पड़े और पढ़ने के बाद मुझे राज भवन बुलाया मैं राज भवन गया पुस्तक उन्हें प्रदान की तब उसे पुस्तक का नाम पचमढ़ी डॉक्टर भाई महावीर की दृष्टि से जो पांडुलिपि लिखी गई थी उसे पुस्तक का नाम डॉक्टर भाई महावीर पड़ा फिर स्वयं डॉक्टर भाई महावीर जी राज्यपाल महोदय ने उसे समय तीन प्रश्नों में अपना और पचमढ़ी से संबंधित भूगोल इतिहास और उसके संबंध में जो लिखा वह अद्भूति था किसी को भी जो जानकारी नहीं है जो डॉक्टर भाई महावीर को थी उन्होंने वह प्रतिलिपियां मुझे प्रदान की आज भी वह पुस्तक सुरक्षित दस्तावेज अनुरूप सुरक्षित रखी गई है पांडुलिपि*

           *इसी के साथ लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में साल दर साल गुजरते गये कलम अपना गति से चलती गई और उसी के साथ उन्होंने कभी कलम से समझौता नहीं किया जब उन्होंने देश के नामी अखबार में -एक लेख प्रकाशित हुआ "नेता नीति और नियत बोझ बन जायेंगे ऐ नुमाइंदे" - तब मानों सियासद दारों की कुर्सियां हिल गई इसी के साथ ही " मनोज दुबे " - उन्होंने कभी व्यवस्था की मृदंग पर राग  जय-जयवंती नहीं गया - कुर्सी दारो की महफिलों की रौनक भी कभी नहीं बने*

                  *उनकी बेबाक लेखनी , लेखन की अभूतपूर्व क्षमता ,बेबाक टिप्पणियों संपादकीय पृष्ठों पर आज भी उम्र के इस पड़ाव में प्रकाशित होते आ रहे हैं*

                 *श्री दुबे वरिष्ठ पत्रकार मनोज दुबे से बातचीत में बताया यह सब कुछ मेरे पिता वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय श्री महेंद्र कुमार जी दुबे की शिक्षा और संस्कार का परिणाम रहा*

       *तक्षशिला "काशी हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति डां योगेश त्रेहन जी एवं जूरी कमेटी की सहमति से 10जुलाई 2025को दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय सम्मान कार्यक्रम में श्री मनोज दुबे वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार को काशी हिंदी विद्यापीठ के समन्वय से सम्मान समर्पण सुदर्शन द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा जाएगा यह सम्मान उन्हें पत्रकारिता एवं लेखन क्षैत्र में अपनी अग्रणी भूमिका के चलते प्रदत्त किया जायेगा*

          *इसकी सूचना मिलते ही पत्रकारिता जगत की शीर्ष हस्तियों ने लेखक एवं कवि साहित्यकारो ने उच्चाधिकारियों एवं राजनेताओं ने अपनी बधाईयां एवं शुभकामनाएं प्रेषित की है*


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