चारों प्रकार के रेशम की डोर को मजबूती प्रदान करता प्रदेश का एकमात्र जिला नर्मदापुरम मलवरी, टसर, ईरी और मूंगा रेशम उत्पादन से प्रदेश में नर्मदापुरम जिले ने बनाया नया मुकाम - AKN News India

Breaking

Post Top Ad

Post Top Ad

Thursday, 15 January 2026

चारों प्रकार के रेशम की डोर को मजबूती प्रदान करता प्रदेश का एकमात्र जिला नर्मदापुरम मलवरी, टसर, ईरी और मूंगा रेशम उत्पादन से प्रदेश में नर्मदापुरम जिले ने बनाया नया मुकाम


मनोज सोनी एडिटर इन चीफ 


 चारों प्रकार के रेशम की डोर को मजबूती प्रदान करता प्रदेश का एकमात्र जिला नर्मदापुरम

मलवरी, टसर, ईरी और मूंगा रेशम उत्पादन से प्रदेश में नर्मदापुरम जिले ने बनाया नया मुकाम


नर्मदापुरम// मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले को राज्य में रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी जिले के रूप में जाना जाता है। जिले में चार प्रकार के रेशम मलवरी, टसर, ईरी और मूंगा का उत्पादन होता है। जिले के अधीनस्थ 16 मलवरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से संचालित हैं, जिससे किसानों और स्थानीय महिलाओं को रोजगार एवं आय का महत्वपूर्ण स्रोत प्राप्त हो रहा है।

 मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में फार्म से फेब्रिक तक उत्पादन गतिविधियाँ संचालित हैं। वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ, जिसमें 32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये की मजदूरी दी गई।

शासकीय रेशम ककून मार्केट, मालाखेड़ी के माध्यम से 13,781 किलोग्राम ककून अन्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को उपलब्ध कराए गए, जिससे 5,199,038 रुपये की आय रेशम उत्पादक किसानों को प्राप्त हुई। इस प्रकार किसानों की आर्थिक स्थिति में वृद्धि हुई है।


वर्ष 2025 की मुख्य उपलब्धियाँ:

मलवरी रेशम ककून उत्पादन – 15,426.5 किलोग्राम, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला है। इसी प्रकार टसर ककून उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मूंगा रेशम का उत्‍पादन पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में पौधरोपण और 500 नग ककून उत्पादन हो रहा है।


मलबरी पौधों का रोपण – 27,500 पौधे, जिससे भविष्य में ककून उत्पादन में और वृद्धि होगी।

जिले की रेशम गतिविधियों से अब तक 45 महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिससे महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। मालाखेड़ी सिल्क यूनिट ने 12.00 लाख रुपये मूल्य का मलवरी सिल्क यार्न मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, महेश्वर को प्रदाय किया है। इससे न केवल जिले का रेशम उद्योग पुनर्जीवित हुआ, बल्कि महेश्वर क्षेत्र में बुनकरों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिला प्रशासन की सक्रिय पहल और रेशम केंद्रों के संचालन से नर्मदापुरम जिले का रेशम उद्योग निरंतर विकसित हो रहा है। जिले में मालाखेड़ी और पचमढ़ी में संचालित प्राकृत शोरूमों से वर्ष 2025 में 73.00 लाख रुपये का रेशम वस्त्र विक्रय हुआ।


आगामी योजनाएं:

रेशम उत्पादकों के लिए फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना करना है। इसी के साथ सिल्क समग्र 2 योजना के लागू होने से रेशम क्षेत्र का विकास और किसानों को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।


No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here