मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
किसानों की समस्याओं को लेकर क्रान्तिकारी मजदूर संगठन निकालेगा रथयात्रा- लीला धर पटेल
रथयात्रा कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी सहित देशभर में निकाली जाएगी
किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर उन्हें जागरूक किया जाएगा
पत्रकार वार्ता के मुख्य विन्दु----
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP),बीज अधिनियम (सीड बिल) 2025 सम्पूर्ण कर्ज माफी, कृषि कार्य के लिए विद्युत प्रदाय में अनेकों कमियां और विद्युत कंपनियों द्वारा किसानों के साथ छलावा, खाद की उपलब्धता में कमी एवं वितरण अवस्था में विसंगति, कृषि उपज मण्डियो में खरीदी, तुलाई, भुगतान आदि व्यवस्थाओं में सुधार। आरजी भूमि अधिग्रहण कानून पूर्वत् 2013 लागू किया जाये,फसल बीमा योजना में व्यापक बदलाव एवं अन्य प्रमुख बिंदु है।
नर्मदा पुरम। पिछले लंबे समय से सरकारों द्वारा कृषि के क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है जिस वजह से मजबूर होकर किसान आत्महत्या कर चुके हैं। कृषि क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के समान है कृषि क्षेत्र एव किसानों के भविष्य में सुधार लाने के लिए विभिन्न मांग सरकारों से की जा रही है, यह बात क्रान्तिकारी मजदूर संगठन के पदाधिकारी लीला धर पटेल ने पीपल चौक स्थित पत्रकार भवन में पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने आगे कहा कि क्रान्तिकारी मजदूर संगठन एक गैर राजनैतिक संगठन है यह किसानों के हित के लिए निरंतर काम करता रहता है, आगामी समय में किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विशाल जनजागृति रथयात्रा अभियान शुरू करने जा रहे है।
उन्होंने कहा कि देश के किसानों की सभी फसलों की सम्पूर्ण खरीद MSP पर सुनिश्चित करने के लिए MSP गारंटी कानून बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2011 में उपभोक्ता मामलों पर बने वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन होने के नाते आप ने अपनी रिपोर्ट के पॉइंट नम्बर b.3 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को सिफारिश करी थी कि "किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैधानिक प्रावधानों के जरिये यह सुनिश्चित किया जाए कि किसान एव खरीददार के मध्य फसल खरीद सम्बन्धी लेनदेन सरकार द्वारा घोषित MSP से नीचे ना हो"। किसानों की आत्महत्याओं पर रोक लगाने हेतु एव कृषि क्षेत्र की स्थिति सुधारने हेतु 2004 में डॉ एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया गया था। जिसने 2006 में अपनी रिपोर्ट पेश करी थी। उस रिपोर्ट में किसानों को C2 लागत में 50% जोड़कर MSP देने की सिफारिश करी गयी थी। 2006-2014 तक यूपीए की सरकार रही लेकिन उन्होंने वह रिपोर्ट लागू नहीं की, उसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव के समय आप के नेतृत्व वाली बीजेपी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वायदा किया लेकिन सत्ता में आने के बाद 2015 में भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया कि वे इस रिपोर्ट को लागू नहीं कर सकते क्योंकि इसे लागू करने से सरकार का वित्तीय बजट बिगड़ जाएगा। 2018 में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल एव सामाजिक नेता अन्ना हजारे ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराने के लिए दिल्ली में अनशन किया था जिसके बाद भारत सरकार ने 6 महीने में उस रिपोर्ट को लागू करने का लिखित वायदा आंदोलनकारी किसानों के साथ किया लेकिन उसके बावजूद उस रिपोर्ट के C2+50% फॉर्मूले को आज तक लागू नहीं किया गया है। स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के तहत फसलों का MSP घोषित किया जाए। किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफ किया जाए, क्योंकि सरकारों द्वारा फसलों पर उचित MSP किसानों को न दिए जाने की वजह से किसान कर्जदार हुए हैं। OECD की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारों द्वारा घोषित MSP न मिलने की वजह से 2000-17 के मध्य किसानों को 45 लाख करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ है, OECD की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा घोषित MSP न मिलने की वजह से 2022-23 में किसानों को 12.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी तरफ 2022 में एक प्रश्न का जवाब देते हुए भारत सरकार के मंत्री भागवत कराड़ ने संसद में बताया कि 2020-21 में भारत के किसानों पर बकाया ऋण 18.4 लाख करोड़ रुपये है।
2013 का भूमि अधिग्रहण कानून पुनः लागू किया जाए जिसके तहत जमीन अधिग्रहण करने से पहले 75% किसानों की लिखित सहमति ली जाने, किसानों को कलेक्टर रेट से 4 गुणा मुआवजा देने एव प्राथमिकता के तौर पर बंजर भूमि का अधिग्रहण करने जैसे प्रावधानों को पुनः लागू किया जाए।
गन्ने का FRP कम से कम 600 रुपये/ क्विंटल घोषित किया जाए एव इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेशानुसार 14 दिनों में किसानों को गन्ने की भुगतान सुनिश्चित करायी जाए और ऐसा न होने की स्थिति में किसानों को 12 से 15% ब्याज का अतिरिक्त भुगतान के तौर पर दिया जाए।
जलवायु परिवर्तन की वजह से सूखे और बाढ़ जैसी घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं जिनसे किसानों को बहुत नुक्सान हो रहा है। जलवायु परिवर्तन से किसानों को हो रहे नुकसानों की भरपाई के लिए सरकार को राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए। सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान फसल बीमा योजना से किसानों को फायदा होने की बजाय कॉरपोरेट घरानों को फायदा हो रहा है इसलिए वर्तमान फसल बीमा योजना में व्यापक बदलाव कर के किसान हितेषी प्रावधान शामिल करने की जरूरत है।
पत्रकार वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से लीला धर पटेल, हरपाल सिंह सोलंकी, संदेश राजपूत, मोनू चौहान, संतोष पटेल, करीम वेग, अर्जुन पटेल, किसान केशव साहू, श्रवण भाई सहित क्रान्तिकारी मजदूर संगठन के अन्य पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे।

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