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Friday, 9 January 2026

रसूलिया में बीच सड़क पर अवैध बोरिंग से जनता त्रस्त, रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक? कलेक्टर' का डर दिखाकर दी जा रही धौंस

एके एन न्यूज नर्मदा पुरम 

 

 रसूलिया में बीच सड़क पर अवैध बोरिंग से जनता त्रस्त, रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक? 

कलेक्टर' का डर दिखाकर दी जा रही धौंस


नर्मदापुरम। शहर के पॉश इलाके मारुति नगर में दबंगई और नियमों को ताक पर रखने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक रेलवे कर्मचारी द्वारा सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते के बीचों-बीच अवैध बोरिंग कराई जा रही है, जिससे मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका और प्रशासन को लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

आम रास्ता बना निजी जागीर, बच्चे और किराएदार परेशान

मारुति नगर निवासी श्रीमती प्रीति खरे ने बताया कि उनके घर के ठीक सामने, हुंडई शोरूम के पास, रेलवे कर्मचारी अभिषेक शर्मा (विजय शर्मा के पुत्र) द्वारा सड़क के बीचों-बीच बोरिंग मशीन उतार दी गई है। मालूम हो कि यह स्थान पूरी तरह शासकीय है और आवाजाही का मुख्य मार्ग है। यह बात संभागीय मुख्यालय पर जनचर्चा का विषय बनी हुई है।

  अवरुद्ध मार्ग: बोरिंग के कारण वाहनों का निकलना बंद हो गया है। खतरे में मासूम: सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को जान जोखिम में डालकर मलबे और मशीनों के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सरकारी संपत्ति को नुकसान: सड़क के नीचे से नगर पालिका की मुख्य पेयजल पाइपलाइन गुजरी है, जिसे इस अवैध खुदाई से भारी क्षति पहुँचने की आशंका है।

नियमों का उल्लंघन और रसूख की धौंस

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस बोरिंग के लिए न तो नगर पालिका से अनुमति ली गई है और न ही एसडीएम कार्यालय से कोई एनओसी (NOC) प्राप्त की गई है। जब इसका विरोध किया गया, तो शिकायतकर्ता को रसूख का डर दिखाया जा रहा है। प्रीति खरे का कहना है कि अभिषेक शर्मा अपनी रेलवे की नौकरी और अपने भाई आशीष शर्मा (जो कलेक्ट्रेट में कार्यरत हैं) के नाम का रौब झाड़ रहे हैं। उनका साफ कहना है कि "शिकायत कहीं भी कर दो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।"

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), तहसीलदार, एसडीएम और यहाँ तक कि कलेक्टर को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की गई है। लेकिन धरातल पर काम का रुकना तो दूर, जाँच तक शुरू नहीं हुई है। स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस "मौन सहमति" को लेकर गहरा आक्रोश है।"क्या रसूखदार कर्मचारियों के लिए नियम अलग हैं? सार्वजनिक सड़क पर बोरिंग करना गैरकानूनी है, फिर भी अधिकारी चुप क्यों हैं?" आक्रोशित निवासी अब देखना यह है कि प्रशासन द्वारा इस मामले में क्या कारवाई की जाएगी। या फिर लीपापोती कर इस मामले में को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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