जिला प्रशासन की नाक के नीचे धान खरीदी में बड़ा खेल, मिट्टी और रेत मिलाकर लगाया जा रहा सरकार को 'चूना' भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला बना जनचर्चा का विषय - AKN News India

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Wednesday, 4 February 2026

जिला प्रशासन की नाक के नीचे धान खरीदी में बड़ा खेल, मिट्टी और रेत मिलाकर लगाया जा रहा सरकार को 'चूना' भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला बना जनचर्चा का विषय


 एके एन न्यूज नर्मदा पुरम 


जिला प्रशासन की नाक के नीचे धान खरीदी में बड़ा खेल, मिट्टी और रेत मिलाकर लगाया जा रहा सरकार को 'चूना'

भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला बना जनचर्चा का विषय 


नर्मदापुरम। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जो कि शहर में जनचर्चा का विषय बना हुआ है‌। मालूम हो कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत से निजी वेयरहाउसों में धान के नाम पर रेत और अमानक सामग्री का भंडारण किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में जिला प्रशासन और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (MPWLC) के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। 

रेत मिलाकर बनाई गई 'कीमती' धान

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, सांगाखेड़ा स्थित बालाजी वेयरहाउस में धान के साथ बड़े पैमाने पर रेत और कचरा (बसुया) मिलाया गया है। बताया जा रहा है कि ट्रकों से रेत उतरवाकर उसे धान की बोरियों में भरा गया। लगभग 2000 क्विंटल रेत को धान बताकर उसके फर्जी बिल तैयार किए गए हैं। जहाँ एक ओर सरकारी वेयरहाउसों में बोरियों की पैकिंग और वजन को लेकर समस्या आ रही है, वहीं बालाजी वेयरहाउस में हर बोरी का वजन जादुई रूप से 40 किलो (मानक) मिलना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अपात्र समितियों को 'पात्र' बनाकर रेवड़ी बांटने का खेल

भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ मिलावट तक ही सीमित नहीं हैं। आरोप है कि जिला प्रबंधक ने जासलपुर और निमसाड़िया जैसी सहकारी समितियों के साथ मिलकर हजारों क्विंटल अमानक धान का संग्रहण कराया है। विशेष रूप से, जो संस्थाएं पिछले कई वर्षों से अपात्र घोषित थीं, उन्हें रातों-रात नियमों को ताक पर रखकर पात्र बनाया गया और उन्हें उपार्जन केंद्र की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

अधिकारियों की मिलीभगत और 'चाबी' का रहस्य

नियमों के विरुद्ध वेयरहाउस की चाबियाँ निजी लोगों के पास छोड़ी गईं, जिससे अमानक धान और मिलावटी सामग्री को खपाने में आसानी हुई। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि यदि समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की चपत लगना तय है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसके अलावा ऐसे कई वेयरहाउस हैं जिनमें यह खेल चल रहा है।

जनचर्चा यह कि जांच हो तो खुलेगा राज

2000 क्विंटल रेत को धान की बोरियों में रेत मिलाकर वजन बढ़ाने का गंभीर आरोप। यह पूरा सेटिंग का खेल है । वर्षों से काली सूची या अपात्र समितियों को अचानक केंद्र कैसे मि ली गया। हर बोरी का वजन कांटा-तौल में बिल्कुल एक समान 40 केजी होना कागजी हेरफेर की ओर इशारा करता है।


इनका कहना है 

यदि ऐसी कोई गड़बड़ी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी । आपके माध्यम से हमारे संज्ञान में मामला आया है , यदि कहीं गड़बड़ी हो रही है तो उन पर कार्यवाही अवश्य होगी।


रश्मि साहू

जिला आपूर्ति अधिकारी नर्मदापुरम

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