मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
होली केवल रंगों का नहीं, प्रेम, उल्लास भाई चारा और एकता का त्योहार है -डॉ.आशीष चटर्जी
ईशान परिसर स्थित द चैम्प्स फन स्कूल में हुआ रंगारंग होली उत्सव
नर्मदा पुरम। रंग, उमंग और उत्साह से भरपूर वातावरण के बीच आज विद्यालय में होली का पर्व बड़े ही आनंदमय और सुरक्षित ढंग से मनाया गया। प्री-प्राइमरी एवं प्राइमरी के बच्चों ने पूरे जोश और उल्लास के साथ रंगोत्सव में भाग लिया। विद्यालय का प्रांगण बच्चों की हंसी, रंग-बिरंगे गुलाल और मधुर संगीत से गूंज उठा।
पिछले तीन दिनों से प्रार्थना सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को होली के महत्व, होलिका दहन की कथा तथा बुराई पर अच्छाई की विजय के संदेश से अवगत कराया जा रहा था। आज भी विशेष रूप से बच्चों को प्राकृतिक रंगों के उपयोग, पानी की बचत और सुरक्षा के साथ होली खेलने की सीख दी गई।
कार्यक्रम के दौरान प्री-प्राइमरी एवं प्राइमरी के बच्चों ने होली के गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। इस वर्ष होली उत्सव की खास बात यह रही कि अभिभावकगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। बच्चों को उल्लास और अनुशासन के साथ होली खेलते देख उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। नन्हें-मुन्नों ने बड़े ही स्नेह और आदर के साथ अपने माता-पिता को गुलाल का तिलक लगाकर “हैप्पी होली” की शुभकामनाएँ दीं। यह दृश्य प्रेम और संस्कारों से परिपूर्ण था, जिसने सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. आशीष चटर्जी द्वारा बच्चों को स्नेह पूर्वक रंग लगाकर होली की शुभकामनाएँ दी गईं। बच्चों ने भी आदरपूर्वक उन्हें गुलाल लगाकर “हैप्पी होली” कहकर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। विद्यालय की निदेशक श्रीमती जूही चटर्जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया। इस आयोजन की प्रभारी श्रीमती रूचि राजपूत एवं सुश्री प्रिया निगम रहीं, जिनके मार्गदर्शन में संपूर्ण कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
बच्चों के विद्यालय से प्रस्थान के पश्चात शिक्षकों ने भी आपसी स्नेह के साथ होली खेली। शिक्षकों के लिए मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। रंग, हंसी और उत्साह के बीच शिक्षकों ने भी इस पर्व को यादगार बना दिया। इस प्रकार ईशान परिसर स्थित द चैम्प्स फन स्कूल में होली का यह उत्सव केवल रंगों तक सीमित न रहकर प्रेम, एकता, संस्कृति और आनंद का सुंदर संगम बन गया।रंगों के संग मुस्कान और संस्कार यही है इस होली उत्सव की विशेष पहचान है।

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