मनोज सोनी एडिटर इन चीफ
विश्व पर्यावरण दिवस पर रिवर व्यू कल्चरल फाउंडेशन सोसाइटी द्वारा फल और छायादार पौधे लगाए
सभी ने कहा पर्यावरण की रक्षा, सुरक्षा और देखभाल हमारा कर्तव्य है
नर्मदापुरम। विश्व पर्यावरण दिवस शहर में अनेक स्थानों पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पर्यावरण की रक्षा सुरक्षा को लेकर हर जगह लोगों ने पौधे लगाए और पर्यावरण का संदेश दिया। इसी के चलते मालाखेड़ी स्थित रिवर रिव्यू कल्चरल फाऊंडेशन सोसाइटी द्वारा कॉलोनी के अंदर विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया।
इस मौके पर कॉलोनी के वरिष्ठ जन एवं मातृ शक्तियों द्वारा भारी संख्या में पौधे लगाए गए। कॉलोनीवासियों में एक स्वर में कहा कि पर्यावरण की रक्षा सुरक्षा के लिए पौधे बहुत आवश्यक हैं। वृक्ष हमारे पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं । इस मौके पर अध्यक्ष प्रीती खरे, पूर्णिमा त्रिपाठी, छाया रबूदा, स्तुति रबूदा रमा रघुवंशी, प्रेम ठाकुर, कृष्णा रघुवंशी, अनुज मालवीय प्रिया श्रीवास्तव,सुनील गुर्जर, राकेश मालवीय लक्ष्मी नारायण परोनिया अशोक पाठक मधुसूदन यादव, सेवाराम मालवीय ,कृष्ण कुरपा, राकेश मालवीय, सुधीर लुटारे, अंकुर बिलोर सुनील गुजरवार, शंकर लाल रघुवंशी , सुरेश उइके, शिव शंकर पगारे ,संतोष शर्मा के एन त्रिपाठी ,लोकेश साहू, सरिता लुटारे ,अनुज मालवीय ,उज्जवला, राधेश्याम अरमा, पुष्पा पाठक सहित अनेक विशिष्ट जन शामिल हुए।
सभी ने एक स्वर में कहा पर्यावरण की रक्षा के लिए पौधे लगाए और देखभाल का लें संकल्प विश्व पर्यावरण दिवस पर हुए इस पौधरोपण कार्यक्रम में सुनील गुर्जर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हमें पौधे लगाना चाहिए और उनकी देखभाल भी करना चाहिए। श्रीमती सरिता लुटारे ने कहा कि पेड़ हमारे लिए बहुत आवश्यक है। इसे हमें ऑक्सीजन तो मिलती है साथ में छाया और फल भी यह हमें देते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण शुद्ध रहता है। वहीं पुष्पा पाठक ने कहा कि पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हमें पौधे लगाना चाहिए । हर व्यक्ति को एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। वहीं शिव शंकर पगारे ने कहा कि शहर में सभी को पौधे लगाना चाहिए। इससे हमारा शहर हरा-भरा तो होगा ही साथ में पर्यावरण भी शुद्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि हमें इनकी रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए । लोगों को अपनी कॉलोनी , पार्क , मोहल्ले, नर्मदा नदी किनारे सहित आसपास भारी मात्रा में पौधे लगाने चाहिए जिससे हमारा वातावरण शुद्ध रहे और हमारी सांसे चलती रहे।

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