शिवराज सरकार में 10298 छात्र और 6999 बेरोजगारों ने की आत्महत्या
मप्र में 70 लाख युवा उच्च शिक्षा से वंचित
बेरोजगारों को लूट रही शिवराज सरकार, व्यापमं ने परीक्षा फीस से वसूले 1000 करोड़ रूपये
शिवराज सरकार युवा नीति नहीं बना रही, युवाओं की
दुगर्ति की नीति बना रही है
नर्मदा पुरम । मध्यप्रदेश के गौरवमयी प्रजातंत्रीय इतिहास पर खरीद-फरोख्त की बदनुमा दाग साबित होती भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार प्रदेश की युवा नीति घोषित करने जा रही है। इस अवसर पर बीते 18 साल की भाजपा सरकार की युवाओं को लेकर नीति और नीयत का मूल्यांकन किया जाना बेहद जरूरी है यह बात कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार युवा नीति नहीं बना रही, युवाओं की
दुगर्ति की नीति बना रही है। श्री शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि
व्यापमं युवाओं के भविष्य बेचने की नीति है। कहते हैं कि 'पूत के पांव' पालने में दिख जाते हैं, मप्र भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की बोली लगाकर विश्व के सबसे व्यापक और वीभत्स व्यवसायिक परीक्षा मंडल के घोटाले को आकार दिया।
इस घोटाले का पहला बड़ा अपराध पीएमटी फर्जीवाड़े से संबंधित था, इसके बाद 13 से अधिक सरकारी नौकरी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में 75 लाख से अधिक प्रदेश के युवाओं के
भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। पुलिस कांस्टेबल, खाद्य निरीक्षण चयन टेस्ट, सूबेदार उपनिरीक्षक व प्लाटून कमांडर, मिल्क फेडरेशन जैसी अनेक भर्ती परीक्षामें घोटाला किया गया।
इतना ही नहीं डेंटल और प्राईवेट मेडीकल कॉलेज का भर्ती घोटाला तो व्यापमं से भी बड़ा है। इस घोटाले के संदर्भ में तो स्वयं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने वर्ष 2006 में विधानसभा में जांच कराने की बात स्वीकारी थी। मगर हजारों युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले इस घोटाले
पर अब तक पर्दा ही डाल कर रखा गया। यह घोटाला इतना बड़ा है कि स्वयं सीबीआई ने इस घोटाले की व्यापकता को देखते हुए सर्वोच्च अदालत में इसकी
जांच में अपनी असमर्थता व्यक्त की थी। बेहद शर्मनाक तथ्य यह है कि व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने न सिर्फ युवाओं के भविष्य को लूटा, अपितु बीते 10 साल में उसने इन बेरोजगार युवाओं से 1046 करोड़ रूपये फीस के रूप में वसूल कर 455 करोड़ रूपये का शुद्ध मनाफा भी कमाया।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि बीते सात वर्षो में उसने 106 विभिन्न प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में 424 करोड़ 36 लाख रूपये 01 करोड़ 24 लाख आवेदकों से वसूली है। अब हाल ही में 10 वीं और
12 वीं की परीक्षाओं के पेपर लीक की सुर्खिया भाजपाई सत्ता को शर्मसार कर रही है।
बेरोजगारी से बेजार कर देने की नीति सरकार ने स्वीकारा खुद का पाप भीषणतम भ्रष्टाचार में डूबी मप्र भाजपा सरकार ने प्रदेश के युवाओं को बेरोजगारी के अंधकार में धकेल दिया है। हाल ही में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने विधानसभा में इस बात को स्वीकारा की प्रदेशके रोजगार कार्यालयों में रजिस्ट्रर्ड 37 लाख 80 हजार 679 शिक्षित एवं 1 लाख 12 हजार 470 अशिक्षित बेरोजगार आवेदक रोजगार की बाट जोह रहे हैं और 01 अप्रैल 2020 से अब तक अर्थात बीते तीन वर्षों में मात्र 21 लोगों को शासकीय और अर्द्धशासकीय कार्यालयों में रोजगार उपलब्ध कराया
गया है।
भविष्य की नहीं आस उच्च शिक्षित युवा निराश
मप्र की भाजपा सरकार की अकर्मण्यता की बजह से यह हालात पैदा हो गये है कि प्रदेश के बेहद शिक्षित और योग्य युवाओं के पास अपने भविष्य संवारने के कोई अवसर नहीं बचे हैं। हाल ही में पटवारी भर्ती परीक्षा में 6000 पदों के लिये 12 लाख युवाओं ने आवेदन दिये जिसमें 4 लाख से अधिक आवेदक इंजीनियर, एमबीए और पीएचडी परीक्षा उत्तीर्ण है। जिसमें से स्नात्तकोत्तर के 01 लाख 80 हजार, एमबीए के 80 हजार, इंजीनियनिंग में बीई और बीटेक के 85 हजार और पीएचडी के 1000 छात्रों ने आवेदन किया है। इसके कुछ वर्ष पहले भी विभिन्न विभागों में चपरासी और चौकीदार बनने,
चतुर्थ श्रेणी के 1333 पदों के लिए, जिसकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा आठवीं पास थी, जिसमें बीटेक, इंजीनियर, एमकॉम, एमएससी और एमए करने वाले पोस्ट ग्रेज्यूट्सों ने आवेदन किया था, 04 लाख से अधिक आये आवेदनों में से 62 हजार से अधिक ग्रेज्यूट थे।
एक समाचार को दिये इंटरव्यू में इस पद के लिए आवेदक लोकेन्द्र वर्मा बताते हैं कि उन्होंने माईक्रो बॉयलाजी में एमफिल किया है, मगर बेरोजगारी की वेबसीने उन्हें यह परीक्षा देने के लिए मजबूर किया। इससे भी शर्मनाक यह हैं कि इसी समाचार पत्र में व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने इस बात की चिंता व्यक्त
की कि अगर इसी प्रकार के आवेदक आते रहे तो कम पढ़े लिख लोगों को नौकरियां नहीं मिलेगी।
बेरोजगारी का वार आत्महत्याओं की मार मप्र में भाजपा सरकार और बेरोजगारी ने साथ-साथ पैर पसारे हैं। छात्रों में बेरोजगारी की निराशा इस हद तक व्याप्त हो गई कि उसने अपने उज्जवल भविष्य का अवसर न देखकर आत्महत्या को गले लगा लिया। यह बेहद दुखद और निराशाजनक बात है कि भाजपा के बीते 17 सालों के कार्यकाल में 17 हजार 326 छात्रों और बेरोजगारों ने आत्महत्या कर चुके हैं
उच्च शिक्षा बदहाल भविष्य बेहाल :-
मप्र में विश्वविद्यालय और उससे संबंधित विभागों में इनरालमेंट 6 लाख 51 हजार 375, वहीं, कॉलेजों में 18 लाख 82 हजार 800 और स्टैंड आलोन इंस्टीट्यूशन में 64 हजार 386 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अर्थात मप्र के कुल सभी शैक्षणिक संस्थानों में 25 लाख 98 हजार 561 छात्र पढ़ रहे हैं। मप्र को देश के सर्वाधिक आदिवासी भाईयों के निवास वाले प्रांत का गौरव हासिल है।
कुल आबादी का 21 प्रतिशत से अधिक आदिवासी भाई मप्र में निवासरत हैं, मगर मप्र के उच्च शिक्षा के कुल इनरॉलमेंट का लगभग 10 प्रतिशत, यानि 2 लाख 94 हजार 399 आदिवासी युवाओं का इनरॉलमेंट है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
मप्र के यशस्वी नेता कमलनाथ जी ने अपने 15 माह के कार्यकाल में यह तय किया था कि मप्र के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में ई-क्लासेस प्रारंभ की जायेंगी। प्राथमिक रूप से 200 कॉलेजों में इसकी शुरूआत निर्धारित की गई थी, जिसमें ई-कंटेंट तैयार कराये जा रहे थे। लैग्वेज लेब स्थापित करने का निर्णय किया गया था, जिसके लिए 200 कॉलेज चिन्हित किये गये थे।
रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को स्किल डेब्लपमेंट के साथ निर्धारित किया गया था। स्थानीय उद्योगों के साथ सामंजस्य बिठाकर स्किल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही थी। सर्किट हाउस में भी पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा, केलू उपाध्याय, चंद्र गोपाल मलैया, श्रीमती कुसुम तोमर, महेंद्र शर्मा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी, फैजान ऊलहक, अजय सैनी, भूपेश थापक सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी

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