पुष्प वाटिका-मूलतः सन्तों की वाटिका है --कृष्णा देवी मिश्रा
नर्मदा पुराम । पं रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के चतूर्थ दिवस के प्रवचन के प्रारंभ में पुष्प वाटिका में चलने का आव्हान करते हुए कहा कि पुष्पबाटिका मूलतः सन्तों की वाटिका है , तुलसीदास जी ने " सिव प्रिय मेकल सेल सुता सी " इस तरह रामकथा को संदर्भित करते हुए कहते हैं कि नर्मदा जी उसी तरह राम कथा में जैसे भगवान शिव को मां नर्मदा प्रिय हैं, पुष्प वाटिका में राम जी किशोरी जी के आमंत्रण पर आते हैं वे बिन बुलाए मेहमान नहीं है पांच शर्तें हैं किशोरी जी की जिसकी पूर्ति राम जी को करनी है दुर्गा सप्तशती में भी तीन शर्तों का उल्लेख है कि दुर्गा जी विवाह उसी से करने की शर्त रखती हैं जो उन्हें संग्राम में उन्हें जीत सके , किशोरी जी पांच शर्तें रखती हैं , हमें , राजा , प्रजा , धनुष यज्ञ में पधारे राजाओं एवं क्रोधी ब्राह्मणों को जीत सके तब लक्ष्मण जी कहते हैं कि श्री राम जी एक ही बाण चढ़ाकर सभी को जीत लेंगे तब किशोरी जी कहती हैं । नहीं बिना धनुष बाण चढ़ाएं आप को जीतना होगा ,कथा विस्तार में श्री राम जी बिना धनुष चलाएं यह 5 शर्तों की पूरी करते हैं , इस तरह श्री राम विवाह की पृष्ठभूमि तैयार होती है ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कथा व्यास मानस कोकिला का पुष्पहारों से अरुण शर्मा प्रबंधक नर्मदा शिक्षा समिति, पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह राजपूत, रविकिशोर जायसवाल पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ,बी के चौहान ,महेंद्र चौकसे , नमन दुबे , राम परसाई , जसबीर छाबड़ा और कैलाश शर्मा ने किया ।
भजनाञ्जली में गायक ऋत्विक राजपूत ने भजन की प्रस्तुति की और आदित्य परसाईं , विपुल दुबे , वेदांत दीक्षित ने संगत की ।
ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी


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