भजन ना हो तो जीवन में सद्गुण टिकते नहीं है , इसलिए जीवन में सद्भगुणों के प्रवाह के लिए भजन आवश्यक है - श्रीमती कृष्णादेवी जी मिश्रा
नर्मदा पुरम। पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के तृतीय दिवस के प्रवचन की शुरुआत करते हुए मानस कोकिला श्रीमती कृष्णादेवी जी मिश्रा ने कहा कि भजन ना हो तो जीवन में सद्गुण टिकते नहीं है , इसलिए जीवन में सद्भगुणों के प्रवाह के लिए भजन आवश्यक है ,दैनिक जीवन के प्रत्येक क्रियाकलाप के साथ-साथ भजन चलते रहने चाहिए , किशोरी जी की वाटिका में श्रीरामजी गुरु आज्ञा से प्रवेश करते हैं । यह सत्संग संत रूपी सरोवर में भीग कर श्रद्धा रूपी माता का दर्शन होता है । "पूजा किन्हीं अधिक अनुरागा " के द्वारा माता जानकी स्वयं के अनुरूप वर की मांग करती हैं , श्रद्धा संयुक्त प्रेम अनुराग ही निकुंज में सखी, रास में बंसी और शिष्य के जीवन में गुरु की वाणी बन जाता है। भक्ति के विभिन्न स्वरूप हमें पुष्प वाटिका में दिखाई देते हैं । एक सखी के द्वारा तुलसीदास जी गौरा माई की ओर संकेत करते हैं और इस तरह की रामजी का अनुसंधान निरंतर जारी रहता है भगवान शंकर स्वयं बंदर रूप धारण करते हैं , मां पार्वती एक सखी के रूप में माता जानकी का मार्गदर्शन करतीं हैं। आपने अपने प्रवचन के दौरान सुंदर मैथिली लोक गीतों के माध्यम से लोगों के हृदय में विराजित राम कथा की सुंदर गायन किया ।
कार्यक्रम की शुभारंभ में पंडित गिरजा शंकर शर्मा पूर्व विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव , जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे , शंकरलाल पालीवाल, बालकृष्ण शर्मा, आईवी तारे, बीएल शर्मा, छगनलाल रघुवंशी ,भगवानदास मीणा, दशरथ प्रसाद तिवारी , राजेश तिवारी, श्रीमती अर्चना पुरोहित , श्रीमती निर्मला हंस राय, तिरुमल नवलानी, पंडित भालचंद्र खड्डर , संत बसंत वशिष्ठ , प्रशांत पालीवाल, चंदन साहू , केके अग्रवाल ने मानस कोकिला पूज्य श्रीमती मिश्र का पुष्पाहार से स्वागत किया भजनांजली में संगीतकार अशोक सोनी ने भजन की प्रस्तुति एवं रामसेवक शर्मा ने संगत की ।
ब्यूरो रिपोर्ट मनोज सोनी


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