पितृ मोक्ष अमावस्या पर मां नर्मदा में दूर-दूर से स्नान करने के लिए आते हैं श्रद्धालु
नर्मदा पुरम। सोलह श्राद्ध के अंतिम दिन अतृप्त आत्माओं को तृप्त करने का दिन है पितृमोक्ष अमावस्या इसे भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। आज के दिन अपने पुरखों का नर्मदा नदी में अंतिम तर्पण कर भाव भीनी विदाई देने से पूरे परिवार के ऊपर उनका सदैव आशीर्वाद बना रहता है। इस बात का उल्लेख पुराणों में मिलता है।
पितृ मोक्ष अमावस्या के चलते शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने अल सुबह से लेकर देर शाम तक मां नर्मदा के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई और अपने परिवार के पुरखों को विधि विधान के साथ विदाई दी। इस अवसर पर मां नर्मदा के विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा दिन भर लग रहा। वही कुछ श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के घाटों पर एक दिन पूर्व से ही डेरा डाल लिया था और रात जागकर भजन कीर्तन करते रहे।
पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन अल सुबह मां नर्मदा में स्नान कर अपने गंतव्य स्थान को रवाना हुए। इस दौरान शहर के रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी आने जाने वाले यात्रियों की दिन भर भारी भीड़ लगी रही। इस अवसर पर मां नर्मदा के सेठानी घाट, कोरी घाट, सर्किट हाउस घाट, विवेकानंद घाट ,मंगलवारा घाट, पोस्ट ऑफिस घाट, बुधनी घाट, सहित अन्य घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं के स्नान का क्रम निरंतर चलता रहा। वहीं श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात् नर्मदा के घाट पर बैठे दरिद्र नारायणो को यथा शक्ति दान पुण्य किया।
मनोज सोनी एडिटर इन चीफ

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