किसानों और मजदूरों की समस्याओं तथा माँगों को लेकर 'किसान मजदूर बचाओ' यात्रा नर्मदापुरम पहुंची
किसान मजदूर बचाओ यात्रा अपनी बुनियादी मांगों को लेकर नर्मदापुरम से बैतूल की ओर रवाना होगी
भोपाल। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की किसान मजदूर बचाओ यात्रा बुधवार को नर्मदा परम पहुंची। इस दौरान राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार काका जी ने स्वर्गीय प्रशांत दुबे पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा किसानों और मजदूरों की समस्याओं और माँगों को लेकर पूरे मध्य प्रदेश में 'किसान मजदूर बचाओ' यात्रा का शुभारंभ 3 अक्टूबर 2023 से किया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा ( सं . कि.मो ) में शामिल 13 राज्यों से पधारे विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा हरी झण्डी दिखाकर 40 दिवसीय इस यात्रा का शुभारंभ किया। यह यात्रा अटल पथ से प्रारंभ हुई। इस दौरान कश्मीर से तनवीर अहमद डार, पंजाब से जगजीत दल्लेवाल, हरियाणा से अक्षय नरवाल, दिल्ली से ऋषि पाल अम्बावता, उत्तराखंड से मुरार सिंह, उत्तर प्रदेश से विमल शर्मा, राजस्थान से बबलू जी गुजरात से जे.के.पटेल, मध्य प्रदेश से शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी', महाराष्ट्र से शंकर दरेकर, केरल से केवी बीजू ओडिशा से सचिन महापात्रा बिहार से जवाहर निराला और संजय कुमार तथा झारखंड से महिला संयोजिका श्रीमती ललिता कुशवाहा उपस्थित रहीं यह यात्रा मध्य प्रदेश के सभी जिलों में जनजागरण करते हुए कुल 5000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस दौरान 15 बिलों में एक दिवसीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा।
सं.कि.मी. के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा निरन्तर किसानों और मजदूरों के हितों की उपेक्षा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार द्वारा 5 जून 2020 को अध्यादेश द्वारा तीन नये कृषि कानून लाये गये थे जिनका संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देशव्यापी विरोध किया गया था। 378 दिन तक चले इस आंदोलन को अंततः केंद्र की एनडीए सरकार को वापस लेना पड़ा था 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नये कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी। नये कृषि कानून वापस लेते समय केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा की 5 माँगों को भी पूरा करने की प्रतिबद्धता जतलाई थी।
जिनमें फसलों की एमएसपी पर खरीदी का गारंटी कानून, ऐतिहासिक महाआन्दोलन के दौरान किसानों पर अकारण लादे गये मुकदमों की वापसी, शहीद हुए 750 किसानों को मुआवजा और उनके परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी, पराली जलाने वाले किसानों पर दण्ड का प्रावधान समाप्त करने और बिजली कानून में किसानों को विश्वास में लेने की माँगें आज दिनांक तक अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हरित क्रांति के जनक और किसान आयोग के अध्यक्ष स्व. एमएस.स्वामीनाथन ने केंद्र सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में किसानों से एमएसपी पर फसल खरीदने की अनुशंसा की थी। केंद्र सरकार एमएसपी पर खरीदी की गारंटी का कानून बना दे तो सरकार की ओर से उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सं.कि.मी. के पदाधिकारियों ने बताया कि देशभर के किसानों का करीब 20 हजार करोड़ रुपए गन्ना मिलों पर बकाया है।
सरकार शुगर मिल मालिकों से किसानों की बकाया राशि वसूलने में उदार रवैया अपनाए हुए हैं जिससे किसान और उसका परिवार कर्ज के दुष्चक्र में बुरी तरह से जकड़ा हुआ है। केंद्र सरकार ने अनुवांशिकी फसल बीटी सरसों के परीक्षण के लिए विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों में अनुमति दी है जिसके दूरगामी परिणामों में भारतीय कृषि का चौपट होना तय है। एक ओर केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भर कृषि की बात करती है, दूसरी ओर बीटी फसलों के परीक्षण की अनुमति देना सरकार की कार्य प्रणाली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है। बीटी सरसों सहित अन्य फसलों पर किए जा रहे परीक्षणों को तत्काल प्रभाव से बंद किया. जाये।
सं.कि.मी. के पदाधिकारियों ने बताया कि आज लखीमपुर खेरी तिकुनिया कांड को दो वर्ष पूरे हो गये हैं। उन्होंने अन्य प्रमुख बातों को प्रमुखता से पत्रकारों के सामने रखा तथा पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए। नर्मदा पुरम से किसान मजदूर बचाओ यात्रा बैतूल की ओर रवाना होगी।
मनोज सोनी एडिटर इन चीफ


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