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Friday, 20 March 2026

नरवाई न जलाकर उसका उचित प्रबंधन करना ही है सबसे बेहतर विकल्प नरवाई जलाने की परंपरा छोड़, वैज्ञानिक तरीके से खेती करना अपनाए किसान


 मनोज सोनी एडिटर इन चीफ 


नरवाई न जलाकर उसका उचित प्रबंधन करना ही है सबसे बेहतर विकल्प

नरवाई जलाने की परंपरा छोड़, वैज्ञानिक तरीके से खेती करना अपनाए किसान


नर्मदापुरम। नरवाई प्रबंधन पर जिले के किसानों का एक सकारात्मक दृष्टिकोण पूरे जिले में देखने को मिल रहा है जहां किसानों द्वारा विभिन्न आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का उचित प्रबंध कर उनका निस्तारण किया जा रहा है। किसानों द्वारा मल्चर रोटावेटर स्ट्रॉ रीपर सहित अन्य कृषि यंत्रों के माध्यम से भूसा बनाने का कार्य किया जा रहा है।कई किसान इन अवशेषों से भूसा तैयार कर पशुपालन में उपयोग कर रहे हैं।

  जिन किसानों को अपने खेतों में फसल कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष से भूसा तैयार नहीं करना है उनके द्वारा मल्चर एवं रोटावेटर का उपयोग कर खेत को अगली फसल के लिए तैयार किया जा रहा है जो की कम समय में संपन्न हो जाता है। इसके साथ ही इससे मिट्टी की उर्वरता क्षमता को भी बल मिलता है तथा फसल अवशेष के ना जलने से पर्यावरण को भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है तथा अन्य किसी भी प्रकार की जान माल की क्षति भी नहीं पहुंचती। आधुनिक कृषि यंत्रों से तैयार किए गए खेत आगे चलकर फसल प्रबंधन के लिए भी उपयुक्त साबित होते है।

जिले के अलग-अलग विकासखंड के किसानों द्वारा नरवाई प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले कृषि यंत्रों तथा नरवाई प्रबंधन के लिए अपनाई जाने वाली विधि भी अन्य किसान भाइयों के साथ साझा किया रही है जिससे अन्य किसान भाई भी नरवाई जलाने जैसी पर्यावरण विरोधी गतिविधि को त्याग कर कृषि तकनीकों के माध्यम से खेती करने की पद्धति को अपनाए। 

विकासखंड सिवनी मालवा के ग्राम रिछी के कृषक गुरु प्रसाद गुर्जर ने बताया कि उनके द्वारा विगत कई सालों से नरवाई का कृषि यंत्रों की सहायता से प्रबंध किया जा रहा है। नरवाई न जलाने के कारण फसल उत्पादन भी कभी खराब नहीं हुआ साथ ही खेत की उर्वरता भी कम नहीं हुई है। इसी प्रकार ग्राम रिछी के ही कृषक आनंद कुमार गुर्जर ने भी फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए फसल कटाई के बाद कल्टीवेटर और रोटावेटर के माध्यम से खेत तैयार करने के तरीके से अवगत कराया।

जिला प्रशासन सतत रूप से फसल अवशेष के उचित प्रबंधन के लिए किसानों को निरंतर तकनीकी सहित अन्य मार्गदर्शन प्रदाय करवा रहा है जिसके माध्यम से किसानों ने भी फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंध करने के लिए अपना सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाना प्रारंभ कर दिया है। निश्चित ही यह बदलाव आने वाले समय में जिले को नरवाई जलाने के मामले से मुक्त बनाने में मददगार साबित होगा।

 प्रशासन द्वारा किसान भाइयों से यह अपील की गई है कि खेतों में फसल अवशेष में आग लगाने के स्थान पर उसके निस्तारण के लिए उचित तकनीक तथा विभिन्न कृषि यंत्रों का उपयोग कर उनकी सहायता लें तथा खेत पर्यावरण तथा नर्मदापुरम जिले को नरवाई की आग जलाने के मामले से मुक्त रखने में सहयोग प्रदान करें।


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